अब नौसेना में महिलाओं को मिलेगा स्थायी कमीशन, SC ने कहा- महिला-पुरुष को बराबरी का हक

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय नौसेना में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन (Permanent Commission) को मंजूरी दे दी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि, ‘महिलाओं में भी पुरुष अफसरों की तरह समुद्र में रहने की काबिलियत है।’


महिलाओं के साथ लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने कहा कि, ‘पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। महिला-पुरुष को बराबरी का हक है।’ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने आगे कहा कि, ‘देश की सेवा करने वाली महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करने पर न्याय को नुकसान होगा। केंद्र द्वारा वैधानिक अवरोध हटाकर महिलाओं की भर्ती की अनुमति देने के बाद नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता।’

केंद्र सरकार की दलील खारिज की

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की यह दलील भी खारिज कर दी जिसमें कहा गया था कि, ‘रूसी जहाजों में उनके लिए शौचालय ना होने की वजह से नौसेना में महिला अधिकारियों को समुद्री ड्यूटी नहीं दी जा सकती।’ कोर्ट ने इसे लेकर कहा कि, ‘सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता नहीं देने के 101 बहाने नहीं हो सकते।’

महिला अफसर ने दायर की थी याचिका

कोर्ट ने कहा कि, ‘जब एक बार महिला अधिकारियों की भर्ती के लिए वैधानिक अवरोध हटा दिया गया तो स्थायी कमीशन देने में पुरुष और महिलाओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।’ बता दें साल 2007 के एसएससी जेएजी बैच की इकलौती महिला अफसर ने स्थायी कमीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव का दावा किया गया था।

केंद्र सरकार ने क्या कहा

बता दें केंद्र सरकार ने पहले यह कहा था कि, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए तैयार है। 11 मार्च को केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि वह सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के लिए तैयार है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा था कि, इस संबंध में वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरा पालन करेगी।

क्या है स्थायी कमीशन?

स्थायी कमीशन का मतलब है कि कोई अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है और इसके बाद वह पेंशन का भी हकदार होगा। बता दें सेना में अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन की शुरुआत हुई थी। इसके तहत पुरुषों और महिलाओं की भर्ती की जाती है और उन्हें 14 साल में रिटायर कर दिया जाता है। लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिलती है। अब तक सिर्फ पुरुषों को ही स्थायी कमीशन मिलते थे और महिलाएं सिर्फ 10 साल ही नौकरी कर पाती हैं। लेकिन अब महिलाएं भी इसकी हक़दार होंगी।

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