SC ने गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका की खारिज, कहा- आरोप गंभीर, पहले हाईकोर्ट जाएं

चैतन्य भारत न्यूज

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर को हाईकोर्ट जाने को कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद गंभीर हैं। अब परमबीर सिंह बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।

परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ दायर सीबीआई जांच (CBI) की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की बेंच ने सुनवाई की थी। परमबीर सिंह की ओर से वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुनवाई के दौरान जस्टिस क़ौल ने पूछा कि, ‘आपने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया? अनिल देशमुख को पार्टी क्यों नहीं बनाया गया?’ इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि, ‘उन्हें पार्टी बनाने के लिए याचिका फ़ाइल की जा चुकी है।’

फिर कोर्ट ने मुकुल रोहतगी से पूछा कि, ‘वो इस मामले की सीबीआई जांच के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटा रहे हैं?’ सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि, ‘ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस सुधार पर दिए गए कोर्ट के फैसले को अभी तक लागू नहीं किया गया है। पुलिस सुधार का मुद्दा तभी उठता है, जब राजनीतिक हलचल में ज्यादा उथल-पुथल होती है।’

हालांकि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है और उन्होंने कहा कि वो बॉम्बे हाईकोर्ट जाएंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता मंजूर की जाती है।

ये है मामला

बता दें परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र के गृह मंत्री के कथित भ्रष्टाचार की सबूत नष्ट होने से पहले जांच की मांग की थी। अपनी याचिका में परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख के ऊपर आरोप लगाया कि, ‘फरवरी में उन्होंने क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के सचिन वाजे और अन्य अधिकारियों तथा सोशल सर्विस ब्रांच के एसीपी संजय पाटिल के साथ मुलाकात की थी और उन्हें 100 करोड़ रुपए की उगाही का निर्देश दिया था।’

परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि, ‘अनिल देशमुख पुलिस विभाग के तबादलों में भ्रष्टाचार करते थे और इस मुद्दे को उठाने वाली महिला अधिकारी हटाया गया था। अनिल देशमुख कई मामलों में चल रही जांच में हस्तक्षेप करते थे और उस तरह से जांच करने के लिए बोलते थे जिस तरह वे खुद चाहते थे। उन्होंने अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार के बारे में सारी जानकारी वरिष्ठ नेताओं और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भी दी थी और ऐसा करने के बाद ही 17 मार्च को उनका तबादला कर दिया गया।’

 

Related posts