शादी में अनिश्चितता के बावजूद शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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चैतन्य भारत न्यूज

बलात्कार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई महिला किसी पुरुष के साथ यह जानते हुए भी शारीरिक संबंध बनाती है कि भविष्य में उन दोनों की शादी नहीं हो सकती है, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर महिला पुरुष के खिलाफ शादी का झूठा वादा करके दुष्कर्म करने का आरोप नहीं लगा सकती है।



जानकारी के मुताबिक, एक सेल्स टैक्स की असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ धोखा देने और बलात्कार करने के आरोप लगाए गए थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। जानकारी के मुताबिक, महिला और पुरुष के संबंध 6 साल तक थे। इस दौरान वो दोनों कई बार एक-दूसरे के घर में भी रह चुके थे। कोर्ट का कहना है कि इससे ये साबित होता है कि दोनों ने आपसी सहमति से संबंध बनाए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता महिला साल 1998 से सीआरपीएफ अधिकारी को जानती है। महिला का आरोप है कि, सीआरपीएफ अधिकारी ने शादी का वादा करते हुए उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाएं। दोनों का रिश्ता साल 2016 तक चला। साल 2014 में सीआरपीएफ अधिकारी ने महिला की दूसरी जाति होने के कारण शादी में परेशानी होने की बात कही थी। बावजूद इसके दोनों का रिश्ता जारी रहा। फिर 2016 में जब सीआरपीएफ अधिकारी ने उसे किसी और महिला से सगाई होने की जानकारी दी तो महिला कमिश्नर ने अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी।

कोर्ट ने इस मामले में कहा कि, ‘गलत मंशा से किए गए झूठे वादे और ऐसा वादा जो भरोसे के साथ दिया गया पर पूरा ना किया जा सका हो इन दोनों में अंतर है।’ कोर्ट ने आगे कहा कि, शिकायतकर्ता को यह पता था कि उससे जो वादा किया गया है उसे तोड़ा भी जा सकता है। वादे को पूरा ना कर सकने को झूठा वादा नहीं कहा जा सकता है। झूठा वादा वो होता है, जिनमें वादे के समय वादा करने वाले की मंशा गलत होती है कि वो को आगे इस वादे को पूरा नहीं करेगा।’

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