अब होगा सुशांत के दिमाग का पोस्टमार्टम, सीबीआई करेगी ‘साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी’, विस्तृत में जानिए इस जांच के बारे में

sushant singh rajput

चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की जांच सीबीआई तेजी से आगे बढ़ा रही है। हाल ही में सीबीआई ने फैसला किया है कि वह इस मामले में मनोवैज्ञानिक शव परीक्षण (साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी) करेगी। सोमवार को सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। सीबीआई के आने से पहले ही विवादित यह मामला और सुर्खियां हासिल कर चुका है। सीबीआई अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस मामले को देख रही है।

क्या होती है साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी?

साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) जिसे बोलचाल की भाषा में दिमाग का पोस्टमॉर्टम भी कहा जाता है, शरीर की ऑटोप्स की तरह ही साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी इस बात की व्याख्या करने की कोशिश होती है कि किसी व्यक्ति ने आत्म हत्या करने की कोशिश क्यों की थी। इसके लिए इसमें मरने वाले के मेडिकल रिकॉर्ड्स, उसके दोस्तों और परिवारों से बातचीत कर यह शोध किया जाता है कि मरने से पहले व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या थी।

केंद्रीय जांच एजेंसी के सीएफएसएल (सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) द्वारा की जाने वाली इस जांच में सुशांत के जीवन के हर पहलू का विस्तृत अध्ययन शामिल होगा। इसमें सोशल मीडिया पर पोस्ट से लेकर व्हाट्सएप चैट और परिवारों, दोस्तों और अन्य लोगों के साथ बातचीत को भी शामिल किया जाएगा। सीबीआई सुशांत के मिजाज, व्यवहार के पैटर्न और यहां तक कि व्यक्तिगत पहचान के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भी जांच करेगी, जिससे कि सुशांत की मौत के दिनों में उनकी मानसिक स्थिति का एक समग्र चित्र बनाया जा सके।

बता दें ऐसा तीसरी बार होगा जब इस तरह की एक जटिल जांच पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। इससे पहले, सुनंदा पुष्कर मामले में और दो साल पहले दिल्ली में हुए बुराड़ी सामूहिक आत्महत्या मामले में इस तरह की जांच की गई थी।

 

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