पुण्यतिथि विशेष: 25 साल की उम्र में बने सन्यासी, इस बीमारी ने कम उम्र में ले ली जान, ऐसा था स्वामी विवेकानंद का जीवन

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चैतन्य भारत न्यूज

देश के युवाओं के लिए आज भी उतने ही प्रासंगिक स्वामी विवेकानंद की आज पुण्यतिथि है। विलक्षण प्रतिभाशाली स्वामी विवेकानंद ने अपने ज्ञान, आध्यात्म और देशप्रेम का पताका दुनियाभर में फहराया। हालांकि 40 बरस पार करने से पहले ही उनका निधन हो गया। इस बात को वे खुद कई बार कह चुके थे कि वे लंबी उम्र नहीं जियेंगे।

स्वामी विवेकानंद जी के बारे में खास बातें:

  • विवेकानंद जी का जन्म सन 1863 में कोलकाता के एक कुलीन परिवार में हुआ था।
  • उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।
  • नरेंद्र का धर्म और आध्यात्म की तरफ बचपन से ही झुकाव था। स्वामी जी के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे।
  • स्वामी जी 25 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ सन्यासी बन गए थे।
  • रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने के बाद, स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना की।
  • स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन का मुख्य सहज भाषण, शिकागो में 11 सितंबर 1893 में आयोजित विश्व संसद में दिया था।
  • स्वामी जी हमेशा हर व्यक्ति को सक्रिय जीवन के लाभों के साथ-साथ जानवरों, गरीबों और बीमार लोगों की देखभाल करने के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से कोई भी भगवान की सेवा कर सकता है।
  • स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि लोग केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित न रहें, बल्कि सम्पूर्ण संसार का ज्ञान ग्रहण करें।
  • उन्हें भारत में हिन्दू धर्म के पुनर्जागरण व राष्ट्रवाद का प्रणेता माना जाता है।
  • अच्छी जीवनशैली के बाद भी स्वामी जी को कई बीमारियां थीं, दमा और डायबिटीज की बीमारियां भी इनमें शामिल थीं।
  • 39 बरस की बेहद कम उम्र में 4 जुलाई 1902 को बेलूर स्थित रामकृष्‍ण मठ में ध्‍यानमग्‍न अवस्‍था में महासमाध‍ि धारण कर प्राण त्‍याग द‍िए।
  •  बेलूर में गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। ये वही जगह थी, जहां उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का अंतिम संस्कार हुआ था।

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