गेम ओवर रिव्यू : आपके रोंगटे खड़े कर देगी तापसी की इस हॉरर-सस्पेंस फिल्म की कहानी

game over review,taapsee pannu,game over review rating

चैतन्य भारत न्यूज

फिल्म : गेम ओवर
कलाकार: तापसी पन्नू, विनोदिनी वैद्यनाथन, अनीश कुरुविल्ला
निर्देशक: अश्विन श्रवणन
निर्माता: वाई नॉट स्टूडियोज, रिलायंस एंटरटेनमेंट
फिल्म टाइप : ड्रामा, थ्रिलर, हॉरर-सस्पेंस
सर्टिफिकेट : UA
अवधि : 1 घंटा 43 मिनट

कहानी :

फिल्म की कहानी गुरुग्राम की है। यहां घर में अकेली रह रही एक लड़की का सिर काटकर कोई फुटबॉल के गोलपोस्ट में गेंद की तरह किक कर गोल कर देता है। फिर आरोपी लाश को कुर्सी पर रखकर उसे जला देता है। इसके बाद एंट्री होती है पेशे से वीडियो गेम डेवलपर स्वप्ना (तापसी पन्नू) की जो अपनी हाउस मेड कलाअम्मा (विनोदिनी) के साथ एक आलिशान बंगले में अकेली रहती है। उसे देखकर लगता नहीं कि वह किसी भी चीज से डर सकती है। लेकिन स्वप्ना अंधेरे से बहुत डरती है। स्वप्ना को एक मानसिक बीमारी भी है जिसकी वजह से अतीत में उसके साथ हुए हादसे की तारीख पास आने पर उसका दम घुटने लगता है। कई बार स्वप्ना को जबरदस्त पैनिक अटैक भी आते हैं। कहानी में भयानक मोड़ तब आता है जब स्वप्ना को यह पता चलता है कि उसने अपने हाथ में जो टैटू बनवाया है वो कोई आम टैटू नहीं बल्कि मेमोरियल टैटू है। इस टैटू की स्याही में किसी मरे हुए इंसान की अस्थियों की राख मिलाई जाती है। ये टैटू लोग अपने करीबी को हमेशा अपने पास रखने के लिए बनवाते हैं। फिर स्वप्ना को यह पता चलता है कि उसके टैटू में जो राख मिली है वह उसी लड़की की है जिसका मर्डर हुआ था। कुछ समय बाद स्वप्ना अपने परिवार और समाज के तानों से तंग आकर खुदकशी करने की कोशिश भी करती है और इस चक्कर में वह अपने दोनों पैर तुड़वा बैठती है। अब आगे क्या होगा यह जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगी।

क्यों देखें फिल्म :

फिल्म में थ्रिलर और सुपर नैचरल लेयर के साथ गेम का भी दिलचस्प एंगल है। फिल्म की कहानी आपको शुरू से लेकर आखिरी तक खुद से बांधकर रखेगी। कहानी में आने वाले सस्पेंस आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे। अगर आप थ्रिलर फिल्में देखने के शौकीन हैं तो इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए। थ्रिलर फिल्मों को नापसंद करने वाले लोग इस फिल्म को एक अनुभव के तौर पर जरूर देख सकते हैं।

कलाकारों की एक्टिंग :

तापसी ने इस फिल्म के जरिए एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किरदार चाहे कोई भी हो वह उसमे फिट बैठती हैं। तापसी ने खौफ, बेबसी और डिप्रेशन के भावों को बहुत ही उम्दा ढंग से दर्शाया है। हर सीन में तापसी ने जबरदस्त एक्सप्रेशन दिए हैं। वहीं विनोदिनी की बात करें तो कलाअम्मा के रूप में भरपूर मनोरंजन किया है।

Related posts