गांव में नहीं मिलता नेटवर्क तो पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन क्लास लेता है यह टीचर, लोग कर रहे जज्बे को सलाम

subrat pati

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में 3 मई तक लॉकडाउन लागू किया गया है। इस दौरान स्कूल और कॉलेज समेत सभी शैक्षणित संस्थान भी बंद हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसलिए कई स्कूल द्वारा ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई है। बच्चों की पढ़ाई में नेटवर्क बाधा न बन सके इसलिए एक टीचर रोजाना पेड़ पर चढ़कर क्लासेस लेते हैं। अपने इसी अंदाज के कारण ये शिक्षक सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं।

लॉकडाउन के कारण गांव में फंसे

इस शिक्षक का नाम है सुब्रत पाती। वे पश्चिम बंगाल के कोलकाता में दो शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाते हैं। सुब्रत हिस्ट्री यानी इतिहास के टीचर हैं। देश में जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो सुब्रत बांकुरा जिले के अहांदा में अपने गांव में थे। ऐसे में वे गांव में ही फंस गए।

दोस्तों के साथ मिलकर पेड़ पर बनाई क्लास

सुब्रत को रोजाना गांव से ही क्लासेस लेनी थी लेकिन वहां नेटवर्क की काफी दिक्कत है। लेकिन उन्होंने इस समस्या से हार नहीं मानी और इसका हल निकाल लिया। सुब्रत ने जब पेड़ पर चढ़कर देखा तो वहां नेटवर्क सही आ रहा था। फिर सुब्रत ने गांव में अपने दोस्तों की मदद लेकर बांस की खपच्चियों और पुआल को रस्सी से बांधकर एक प्लेटफॉर्म बनाया और उसे घर के पास एक नीम के पेड़ पर उसकी शाखाओं के बीच फंसाकर रख दिया।

खाना भी साथ ले जाते हैं

इस तरह सुब्रत ने नीम के पेड़ पर ही क्लासरूम बना दी और अब वह रोजाना क्लास के टाइम पर पेड़ की शाखाओं के बीच फंसे लकड़ी के उसी प्लेटफॉर्म पर चढ़कर बैठ जाते हैं। वे घंटों तक वहां बैठकर क्लास लेते हैं। सुब्रत खाना-पानी भी अपने साथ पेड़ पर ही ले जाते हैं।

गर्मी से होती है परेशानी

हालांकि, पेड़ पर बैठने के कारण सुब्रत को गर्मी से परेशानी होती है। कई बार तो वे शौचालय भी नहीं जा पाते हैं। पानी और धूप से बांस का बना प्लेटफॉर्म भी खराब हो जाता है जिसके बाद उसे फिर से ठीक किया जाता है। सुब्रत का कहना है कि, ‘मेरी क्लास में बच्चों की अटेंडेंस भी अच्छी रहती है, इससे मेरा कॉन्फिडेंस और बढ़ता है। इसलिए मैं नहीं चाहता कि उनकी पढ़ाई में कोई समस्या आए।’ कोरोना वायरस संकट के बीच सुब्रत जिस तरह से अपने जज्बे से बच्चों को पढ़ाई करवा रहे हैं, उसके लिए उनकी खूब तारीफ की जा रही है।

 

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