वजन न बढ़ जाए इस डर से किशोरी खाने लगी धागा, आंतों से निकली 3.5 फीट लंबी रस्सी

आंत का कुछ हिस्सा भी काटना पड़ा, एमवाय के सर्जरी विभाग में हुआ ऑपरेशन

चैतन्य भारत न्यूज।

इंदौर। वजन बढ़ जाने का डर किस कदर नुकसान पहुंचा सकता है, इसका अजीबोगरीब उदाहरण एमवाय के सर्जरी विभाग में सामने आया है। 15 साल की किशोरी की आंत से धागों के टुकड़ों के इकट्ठा होने से बनी करीब 3.5 फीट की रस्सी निकाली गई है। डॉक्टरों के मुताबिक मेडिकल साइंस में इस तरह का मामला दुर्लभ है। किशोरी ने यह स्वीकार किया है कि वजन बढ़ने के डर से वह खाना कम खाती थी, पानी भी कम ले रही थी। संभवतः भूख को दबाने के लिए वह धागे और चादर के टुकड़े खाने लगी थी।

छोटी आंत में फंसी थी रस्सी

पंद्रह साल की किशोरी पेटदर्द, उल्टियां और पेट फूलने की शिकायत के साथ सर्जरी विभाग में डॉ. मनीष कौशल व डॉ. अरविंद शुक्ला की यूनिट में आई थी। ऑपरेशन करने वाली एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि टीम ने विभिन्न जांच व सीटी स्कैन करवाया। जांच में पता चला कि छोटी आंत के अंतिम भाग में सिकुड़न है। ऑपरेशन के दौरान बड़ी आंत के शुरुआती डेढ़ फीट और छोटी आंत के आखिरी 2 फीट के हिस्से में रस्सी जैसी चीज फंसी हुई थी। इसने आंतों को भी उलझा दिया था। आंतों को खोलने पर धागों के हजारों टुकड़ों से रस्सीनुमा चीज बन चुकी थी। टीम ने उसे धीरे-धीरे खींचकर निकाला। करीब चार घंटे चले ऑपरेशन में सड़ी हुई आंत के 60 सेमी हिस्से को काटकर निकाला गया। मल निकलने के लिए भीतर से रास्ता बनाया गया। किशोरी की पेशाब की थैली से भी 5 सेमी की पथरी भी निकाली गई।

आंत में धागे पहुंचने का यह मामला दुर्लभ

डॉ. शुक्ला ने बताया कि मानसिक रोग होने या अवसाद में बाल, कागज, लोहे के टुकड़े और मिट्टी खाए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। ये चीजें भी पेट में ही मिलती रही हैं और निकाली गई हैं लेकिन आंतों में धागों का इस तरह से इकट्ठा होना दुर्लभ मामला है।

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डेढ़ साल से खा रही थी धागे

किशोरी से बातचीत में पता चला है कि वह वजन बढ़ जाने के डर से परेशान रहती थी। इसी तनाव में उसने धागे खाना शुरू कर दिया। मां भी काम के लिए बाहर जाती थी इसलिए पूरा ध्यान नहीं दे पाई। किशोरी करीब डेढ़ साल से धागे खा रही थी। किशोरी धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी, उसे समझाइश भी दी गई है। साथ ही काउंसलिंग भी करवाई जाएगी।

विभागाध्यक्ष डॉ. आरके माथुर के निर्देशन में इस काम को अंजाम दिया गया। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. सुधांशु, डॉ. नेहा, डॉ. अमित व डॉ. वीरेंद्र शामिल थे। एनेस्थीसिया डॉ. केके अरोरा व डॉ. दीपाली वलेचा ने दिया। ओटी नर्स इंचार्ज आशा सोनकर और अमृता शर्मा थीं।

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