कश्मीर में अलगाववादी नेेताओं की गिरफ्तारी, महबूबा मुुफ्ती ने उठाए सवालः क्या यह जायज!

चैतन्य भारत न्यूज।

श्रीनगर। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमले के बाद से जम्मू कश्मीर में हलचल जारी है। शुक्रवार की शाम को अलगाववादी नेता यासीन मलिक को हिरासत में लिया गया है और जमात-ए-इस्लामी के करीब दर्जन भर नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी अनुसार कश्मीर को अलग दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है। इसके समर्थन में जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन भी हुए हैं।

सुनवाई के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को हाई अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही केंद्र सरकार ने सुरक्षाबलों की 120 कंपनियां जम्मू-कश्मीर भेजी हैं। एक कंपनी में 100 जवान होते हैं।

किस कानून के तहत गिरफ्तारी

हुर्रियत नेताओं की गिरफ्तारी पर पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, पिछले 24 घंटों में, हुर्रियत नेताओं, जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। किस कानून के तहत उनकी गिरफ्तारी जायज है।

पहले ली थी सुरक्षा वापस

बता दें कि 14 फरवरी को आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। हमले के बाद 20 से अधिक अलगाववादियों की सुरक्षा वापस ले ली गई है। इनमें अलगाववादी नेता यासीन मलिक, मीरवाइज उमर फारूक, सैयद अली गिलानी, आगा सैयद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी और शबीर अहमद शामिल हैं।

क्या है 35?

अनुच्छेद 35ए प्रावधान जम्मू कश्मीर के बाहर के व्यक्ति को जम्मू-कश्मीर में अचल संपत्ति खरीदने से प्रतिबंधित करता है। इस प्रावधान को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिस पर सुनवाई होनी है।

 

 

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