सावधान: हवा के जरिए फैल रहा है कोरोना वायरस! The Lancet की रिपोर्ट में किए गए 10 दावे

चैतन्य भारत न्यूज

भारत समेत ज्यादातर देशों में कोरोना महामारी का प्रकोप फिर से फैलता दिख रहा है। इस बीमारी के चलते अब तक लाखों लोगों की जान जा चुकी है और करोड़ों लोग संक्रमित हुए हैं। इसी बीच एक डरा देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। प्रसिद्ध जर्नल द लांसेट ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि, ‘यह घातक वायरस मुख्य रूप से हवा से फैलता है और इस बात के पुख्ता सबूत हैं। ऐसे में सुरक्षा प्रोटोकॉल में तत्काल बदलाव लाए जाने की जरुरत है।’

इंग्लैंड, अमेरिका और कनाडा के छह विशेषज्ञों द्वारा यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इनका कहना है कि हवा के जरिए वायरस नहीं फैलता, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। जबकि ज्यादातर वैज्ञानिक ऐसा ही मानते हैं। नई रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल में तत्काल बदलाव किए जाने का सुझाव दिया है।

एक्सपर्ट्स की इस टीम में CIRES (Cooperative Institute for Research in Environmental Sciences) के केमिस्ट जोस लुइस जिमेनेज का भी नाम है। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि उन्हें कोरोना वायरस के हवा में फैलने के बारे में पुख्ता सबूत मिले हैं और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने भी इस रिसर्च की समीक्षा की है और हवा में वायरस के फैलने के दावों को हाइलाइट किया है। इस स्टडी में कहा गया है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि बड़े ड्रॉपलेट्स से ही कोरोना वायरस का प्रसार होता है। इसमें कहा गया है कि यह प्रमाणित हो चुका है कि यह वायरस हवा के जरिए तेजी से फैलता है।

इस दावे को साबित करने के लिए स्टडी में 10 कारण दिए गए हैं-

  1. वायरस के सुपरस्प्रेडिंग इवेंट तेजी से SARS-CoV-2 वायरस को आगे ले जाता है। वास्तव में, यह महामारी के शुरुआती वाहक हो सकते हैं। ऐसे ट्रांसमिशन का बूंदों के बजाय हवा (aerosol) के जरिए होना ज्यादा आसान है।
  2. क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बीच यह ट्रांसमिशन देखा गया, जबकि ये लोग एक-दूसरे के कमरे में नहीं गए।
  3. विशेषज्ञों का दावा है कि सभी कोविड-19 मामलों में 33 प्रतिशत से 59 प्रतिशत तक मामलों में एसिम्प्टोमैटिक या प्रिजेप्टोमैटिक ट्रांसमिशन जिम्मेदार हो सकते हैं जो खांसने या छींकने वाले नहीं हैं।
  4. वायरस का ट्रांसमिशन आउटडोर (बाहर) की तुलना में इंडोर (अंदर) में अधिक होता है और इंडोर में अगर वेंटिलेशन हो तो संभावना काफी कम हो जाती है।
  5. नोसोकोमियल संक्रमण (जो एक अस्पताल में उत्पन्न होते हैं) को उन स्थानों पर भी पाया गया जहां हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने पीपीई किट का उपयोग किया था। पीपीई किट को कॉन्टैक्ट और ड्रॉपलेट से सुरक्षित बनाया गया, लेकिन हवा के रास्ते (aerosol) से बचने के लिए कोई तरीका नहीं होता।
  6. विशेषज्ञों का कहना है कि SARS-CoV-2 हवा में पाया गया है। लैब में SARS-CoV-2 वायरस कम से कम 3 घंटे तक हवा में संक्रामक हालत में रहा। कोरोना के मरीजों के कमरों और कार में हवा के सैंपल में वायरस मिला।
  7. SARS-CoV-2 वायरस कोरोना मरीजों वाले अस्पतालों के एयर फिल्टर्स और बिल्डिंग डक्ट्स में मिले हैं। यहां केवल हवा के जरिए (aerosol) ही पहुंच सकता है।
  8. विशेषज्ञों ने पाया कि संक्रमित पिंजरों में बंद जानवरों में भी वायरस के लक्षण मिले और यह एयर डक्ट के जरिए हुआ।
  9. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हवा से वायरस नहीं फैलता, इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
  10. उनका अंतिम तर्क था कि दूसरे तरीकों से वायरस फैलने के कम सबूत हैं, जैसा कि रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट या फोमाइट।
  11. यदि विशेषज्ञों का यह नया दावा स्वीकार कर लिया जाता है, तो दुनियाभर में कोरोना के खिलाफ जंग की रणनीति पर भारी असर पड़ सकता है। इससे लोगों को अपने घरों के अंदर भी मास्क पहनना पड़ सकता है और शायद हर समय।

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