मंत्र जाप करते समय करें इन नियमों का पालन, तभी मिलेगा पूरा फल

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में मंत्रों का विशेष महत्व है। मंत्रों के जाप का फल तभी मिलता है, जब उससे संबंधित नियमों का पूरी तरह के पालन किया जाए। कहते हैं कि मंत्रो के  नियमों का पालन करेंगे तो घर में न केवल सुख-शांति आएगी, बल्कि आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आइए जानते हैं मंत्रों का नियम।



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मंत्र के प्रकार

वाचिक जप- वाणी द्वारा सस्वर मंत्र का उच्चारण करना वाचिक जप की श्रेणी में आता है।

उपांशु जप- भगवान के ध्यान में मन लगाकर, जुबान और होंठों को कुछ कंपित करते हुए, इस प्रकार मंत्र का उच्चारण करें कि केवल स्वंय को ही सुनाई पड़े। ऐसे मंत्रोचारण को उपांशु जप कहते हैं।

मानसिक जप- मानसिक जप वो होता है जो सुखासन या पद्मासन में बैठकर ध्यान मुद्रा में अंतर्मन से किया जाता है।

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मंत्र जपने के नियम

  • साधना के लिए कुश के आसन पर बैठना चाहिए क्योंकि कुश उष्मा का सुचालक होता है और जिससे मंत्रोचार से उत्पन्न ऊर्जा हमारे शरीर में समाहित होती है।
  • मंत्र जप के समय तर्जनी अंगुली से माला का स्पर्श नहीं होना चाहिए।
  • मंत्र जप करने के पूर्व हाथ में माला लेकर प्रार्थना करनी चाहिए कि माला से किया गया मंत्र जप सफल हो ।
  • माला हमेशा व्यक्तिगत होनी चाहिए, दूसरे की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • इसके अलावा जिस माला से मंत्र जप करते हैं, उसे धारण नहीं करना चाहिए।
  • चंदन की माला दो प्रकार की होती है- लाल चंदन और श्वेत चंदन
  • देवी के मंत्रो का जप लाल चंदन की माला से करना फलदायी होता है
  • भगवान कृष्ण के मंत्रो के लिए सफेद चंदन की माला का प्रयोग कर सकते हैं।

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