डायबिटीज के मरीज दिन में तीन बार करें भोजन, नहीं पड़ेगी इंसुलिन के इंजेक्शन लेने की जरूरत

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चैतन्य भारत न्यूज

मधुमेह यानी डायबिटीज एक ऐसा रोग है जिसमें खून और पेशाब में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसा शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन की प्रक्रिया में गड़बड़ी आने से होता है। डायबिटीज आनुवांशिक, उम्र बढ़ने पर, मोटापे के कारण या तनाव के कारण हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों को कुछ बातों का विशेष तौर से ध्यान रखना जरूरी है।



डायबिटीज के रोगी का आहार सिर्फ पेट भरने के लिए ही नहीं होता, बल्कि उसके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को संतुलित रखने में भी सहायक होता है। चूंकि यह रोग मनुष्य के साथ जीवन भर रहता है इसलिए जरूरी है कि वह अपने खानपान का हमेशा ध्यान रखे। डॉक्टर डायबिटीज के मरीजों को अक्सर दिन में छह बार कम मात्रा में भोजन करने की सलाह देते हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक शोध के जरिए पता चला है कि इस तरह आहार का सेवन करने से मरीजों को और ज्यादा गहन इलाज की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दिन में डॉक्टर तीन बार आहार लेने की ही सलाह दे रहे हैं।

6 बार खाने का तरीका गलत

यह शोध इजरायल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया है। शोध में कहा गया है कि, डायबिटीज के मरीजों का 6 बार खाने का तरीका गलत है और इससे कई परेशानियां हो सकती हैं। यह उन मरीजों के लिए सबसे ज्यादा खराब है, जिन्हें रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसुलिन के ज्यादा डोज से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में असंतुलन होता है। इससे वजन में तो बढ़ोतरी होती ही है और साथ ही दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

जैविक घड़ी के अनुसार भोजन करें

शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि, ‘शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार खाना खाने से शारीरिक प्रक्रियाओं को एक साथ बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है, जिससे एक व्यक्ति की इंसुलिन की जरूरतों में कमी लाई जा सकती है।’ जैविक घड़ी के मुताबिक, व्यक्ति को दिन में तीन बार भोजन करना चाहिए। इससे वजन तो कम होता ही है और साथ ही रक्त शर्करा का स्तर भी ठीक रहेगा।

इंसुलिन लेने की जरूरत नहीं

शोधकर्ता और प्रोफेसर डेनियल जाकुबोविच ने बताया कि, डायबिटीज पीड़ितों के लिए पारंपरिक आहार दिनभर में छह छोटे हिस्सों में बंटा होता है। लेकिन, यह आहार रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में प्रभावकारी साबित नहीं हुआ है। इसके कारण डायबिटीज के मरीजों को अतिरिक्त इलाज और इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। इंसुलिन से रक्त शर्करा के स्तर में तो बढ़ोतरी होती ही है और साथ ही इससे व्यक्ति का वजन भी बढ़ता है। शोधकर्ता के मुताबिक, डायबिटीज के मरीज को स्टार्च से भरपूर आहार को दिन की शुरुआत में ही लेना चाहिए। जिससे उनके शरीर में ग्लूकोज के स्तर में संतुलन रहे और ग्लाइसेमिक इंडेक्स का स्तर भी सुधरता रहे। यदि डायबिटीज के मरीज इस आहार का पालन करेंगे तो उन्हें इंसुलिन के इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तीन बार आहार लेने वाले मरीजों के वजन में आई कमी

शोध में पाया गया कि, दिन में छह बार आहार लेने वालों के मुकाबले तीन बार आहार लेने वाले मरीजों के वजन में कमी आई और उनके रक्त शर्करा का स्तर भी ज्यादा नियंत्रित हुआ। साथ ही इन लोगों में इंसुलिन की जरूरत में भी कमी आई और कुछ मरीजों ने तो पूरी तरह से ही इंसुलिन का इस्तेमाल बंद कर दिया।

विशेष ध्यानार्थः यह आलेख केवल पाठकों की अति सामान्य जागरुकता के लिए है। चैतन्य भारत न्यूज का सुझाव है कि इस आलेख को केवल जानकारी के दृष्टिकोण से लें। इनके आधार पर किसी बीमारी के बारे में धारणा न बनाएं या उसके इलाज का प्रयास न करें। यह भी याद रखें कि स्वास्थ्य से संबंधित उचित सलाह, सुझाव और इलाज प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकते हैं।

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