देश में हर 10 में से एक व्यक्ति थायरॉइड का शिकार, जानें इसका कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

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चैतन्य भारत न्यूज

थायरॉइड इन दिनों एक आम बीमारी बन गई है। देश में लगभग एक तिहाई लोगों में थायरॉइड की समस्या देखने को मिलती है। इंडियन थायरॉइड सोसाइटी के मुताबिक, भारत में हर दस में से एक व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित है। आईटीसी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 32 फीसदी भारतीयों में थायरॉइड का स्तर सामान्य पाया जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड का खतरा 10 गुना ज्यादा होता है। महिलाओं में ऑटो इम्यून प्रॉब्लम की बढ़ती समस्या इसका मुख्य कारण है।


थायरॉइड गले में तितली के आकार की एक एंडोक्राइन ग्लैंड है जो गले के निचले हिस्से में सामने की ओर मौजूद होता है। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित बनाए रखने में मदद करत है। इस ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन खून के साथ मिलकर हमारे पूरे शरीर पर असर करते हैं। ये हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म, हार्ट फंक्शन, हड्डी, त्वचा और आंतों के कार्य को सही बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि यह ग्लैंड थायरॉइड हार्मोन्स को ठीक से बनाने में सक्षम नहीं रहते हैं, तो यह शरीर के लिए समस्या बन जाती है। इसमें मौजूद हार्मोन टी3, टी4 और टीएसएच का स्तर कम या ज्यादा होने से समस्या होती है। मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर के तापमान, कैलोरी की खपत, दिल की धड़कनें आदि को प्रभावित करता है इसलिए इसका सही रूप से काम करना भी बहुत जरूरी है, जो थायरॉइड की समस्या के साथ संभव नहीं है। शुरुआती स्तर पर तो थायरॉइड के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं और यही कारण है कि धीरे-धीरे यह एक गंभीर समस्या बन जाती है।

ये हैं थायरॉइड के लक्षण

  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • गर्दन में सूजन
  • बालों और त्वचा की समस्या
  • पेट खराब होना
  • हार्मोनल बदलाव
  • मोटापा
  • थकान, अवसाद या घबराहट

बच्चों को थायरॉइड होने का कारण

बच्चों में जब थायरॉइड की समस्या होती है तो उसके लिए माता-पिता जिम्मेदार होते हैं। यदि मां को गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड है तो बच्चों में थायरॉइड होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा मां के खानपान से भी बच्चों के सारे फंक्शन प्रभावित होते हैं। यदि गर्भावस्था के दौरान मां के डाइट चार्ट में आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का अभाव है तो इसका असर शिशु पर पड़ता है। वैसे तो बड़ो, किशोर और बच्चों में थायरॉइड के लक्षण सामान्य होते हैं लेकिन अगर बच्चों में यह होता है तो इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।

कैसे होती है थायरॉइड की जांच?

थायरॉइड की जांच ब्लड टेस्ट के जरिए की जाती है। शुरुआती चरण में इसकी पहचान होने पर इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है, लेकिन यदि समय पर निदान नहीं किया गया तो मरीज का स्वास्थ्य भी बिगड़ता चला जाता है।

थायरॉइड से बचाव

  • नियमित रूप से फल और हरी सब्जियों का सेवन करें। इससे थायरॉइड संतुलित रहता है।
  • टमाटर और हरी मिर्च थायरॉइड को नियंत्रण करने में कारगर है। इसलिए अपने आहार में इन चीजों को जरूर शामिल करें।
  • अदरक भी इस समस्या से निजात दिलाता है। अदरक में मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा और इसका एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण थायरॉइड को बढ़ने से रोकता है।

थायरॉइड का इलाज

  • थायरॉइड को ऐसे उपचार की आवश्यकता है जो थायरॉइड से निकलने वाले हार्मोन को संतुलित रखने में कारगर हो।
  • इसके शुरुआती इलाज के लिए दवाओं का सहारा लिया जाता है। लेकिन यदि यह समस्या गंभीर है तो सर्जरी की मदद से हार्मोन्स को संतुलित रखने की कोशिश की जाती है।
  • थायरॉइड की किसी भी समस्या के शुरू होने पर इसका सही समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को समय पर लें।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए भी बेहद जरूरी है कि वह समय-समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से थायरॉइड की जांच कराती रहें।

इन चीजों से करें परहेज

  • यदि आप थायरॉइड के मरीज हैं तो आप अपने आहार में तली-भुनी चीजों को बिल्कुल भी ना शामिल करें।
  • ज्यादा चीनी या मीठी चीजों का सेवन करने से बचें।
  • पत्ता गोभी और ब्रोकली से परहेज करें।
  • ग्लूटेनयुक्त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करें, क्योंकि इसमें ऐसे प्रोटीन होते हैं जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं।
  • कैफीन में मौजूद एपिनेफ्रीन और नोरेपिनेफ्रीन थायरॉइड को नियंत्रित करते हैं।

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