इन आदतों की वजह से भी होते हैं हम ठंड का शिकार

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चैतन्य भारत न्यूज

ठंड का मौसम दस्तक दे चुका है। ऐसे में खांसी−जुकाम या ठंड लगने जैसी समस्याएं होना आम बात है। रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे ऐसे कई कारण हैं  जिनकी वजह से हमें सर्दी लग जाती है। हम अपने रूटीन में कुछ बातों का ध्यान रखकर रोगाणुओं (germs) की चपेट में आने से बच सकते हैं। आइए जानते हैं किन आदतों की वजह से हम ठंड के शिकार हो जाते हैं।



धूप न लेना

धूप विटामिन डी का मजबूत स्त्रोत होती है। धूप में न निकलने की वजह से विटामिन डी की कमी हो जाती है और ऐसे में हम जल्दी ही रोगाणुओं की चपेट में आ जाते हैं।

सही सांस न लेना

सांस लेने के तरीके से भी हम सर्दी का शिकार हो सकते हैं। यदि आपके आसपास कोई छींक रहा है या कफ का शिकार है तो उसके नजदीक सांस लेने के बजाय उससे दूरी बनाकर सांस लें।

पानी कम पीना

यदि आप पानी कम पीते हैं तो भी ठंड के शिकार हो सकते हैं। आप थकान भी महसूस कर सकते हैं। इसलिए आप ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की आदत डालें।

नाखून चबाना

अगर आपकी भी नाखून मुंह में लेने की आदत है तो इसे छोड़ दीजिए। नाखून मुंह में लेने, चेहरे पर हाथ लगाने, नाक आदि को बार बार छूने से रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

अधिक मीठा

अधिक मीठा भी आपको ठंड की चपेट में ले सकता है। दरअसल अधिक शक्कर वाली डाइट प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्युनिटी सिस्टम) को प्रभावित करती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली से हम ठंड का शिकार हो सकते हैं।

भीड़भाड़ वाली जगह जाना

अगर आप बदलते मौसम के दौरान भीड़भाड़ वाली जगह जाते हैं तो भी आपको सर्दी-जुकाम हो सकता है। बड़े मॉल आदि भीड़भाड़ वाली जगह आप रोगाणु की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

हाथ न धोना

गंदे हाथ अच्छी तरह धोएं क्योंकि इससे आप सर्दी जुकाम के रोगाणुओं से बच सकते हैं। इसलिए हाथ साबुन और गरम पानी से धोएं।

पीड़ित से नजदीकी

सर्दी-जुकाम के शिकार व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना बहुत जरुरी है। उनसे बात करते समय नजदीक रहकर भी हम इस बीमारी को आमंत्रित करते हैं। पीड़ित व्यक्ति के नजदीक रहकर हम रोगाणुओं के शिकार हो सकते हैं।

गंदा मोबाइल-की बोर्ड

रोजाना छुए जाने वाले उपकरणों की साफ-सफाई करना बहुत जरुरी है। क्योंकि की-बोर्ड, माउस, दरवाजे के हैंडल, मोबाइल आदि रोगाणुओं के वाहक बनते हैं।

विशेष ध्यानार्थः यह आलेख केवल पाठकों की अति सामान्य जागरुकता के लिए है। चैतन्य भारत न्यूज का सुझाव है कि इस आलेख को केवल जानकारी के दृष्टिकोण से लें। इनके आधार पर किसी बीमारी के बारे में धारणा न बनाएं या उसके इलाज का प्रयास न करें। यह भी याद रखें कि स्वास्थ्य से संबंधित उचित सलाह, सुझाव और इलाज प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकते हैं।

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