दिशा रवि केसः कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुर्ख़ियों में, कहा- सरकार से असहमति पर सबको जेल में नहीं डाल सकते

चैतन्य भारत न्यूज

टूलकिट मामले में गिरफ्तार पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को मंगलवार को जमानत मिल गई। न्यायाधीश ने दिशा को एक लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी। देर रात तक दिशा तिहाड़ जेल से बाहर भी आ गईं। दिशा रवि को जमानत देते हुए पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने कुछ कड़ी टिप्पणियां भी कीं, जो सुर्खियों में बनी हुई हैं।

पुलिस की कमजोर और अधूरी जांच

दिशा रवि की जमानत पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा ने कहा कि, ‘इस कमजोर और अधूरी जांच को ध्यान में रखते हुए मुझे 22 साल की युवा महिला, जिस पर अब तक का जीवन दोषमुक्त रहा है और समाज में जिसकी जड़ें बहुत गहरी हैं, के खिलाफ जमानत के सामान्य नियम का उल्लंघन करने और उसे जेल भेजने का कोई ठोस कारण नहीं मिलता है।’

ऋगवेद का किया जिक्र

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, ‘मेरे विचार से, नागरिक किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में सरकार के विवेक के रखवाले वाले होते हैं। उन्हें केवल इसलिए सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता है क्योंकि वे राज्य की नीतियों से असहमत हैं। सरकारों के जख्मी घमंड पर मरहम लगाने के लिए राजद्रोह का अपराध नहीं लगाया जा सकता है।’ ऋगवेद का जिक्र करते हुए कहा कि, ‘हमारे पास चारों ओर से कल्याणकारी विचार आते रहें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके और अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों।’

13 फरवरी को पुलिस ने किया था गिरफ्तार

बता दें दिल्ली पुलिस ने टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस को बेंगलुरु से 13 फरवरी को गिरफ्तार किया था। उसके बाद दिशा रवि को दिल्ली लाया गया, जिसके बाद पुलिस को उनकी कस्टडी मिली। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि जिस टूलकिट के जरिए दिल्ली में किसान आंदोलन के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, उसको दिशा रवि ने एडिट किया था। दिल्ली पुलिस ने साथ ही आरोप लगाया था कि दिशा रवि के जरिए ही ये टूलकिट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग के पास भेजी थी, जिसे बाद में ग्रेटा ने ट्वीट कर दिया था। दिल्ली पुलिस इस मामले में दिशा रवि के अलावा निकिता जैकब और शांतुनु को गिरफ्तार करने की कोशिश में है।

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