रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में पेश किया तीन तलाक बिल, ओवैसी ने कहा- मुस्लिम महिलाओं से इतनी मोहब्बत, तो केरल की महिलाओं से क्यों नहीं

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. 17वीं लोकसभा के पहले सत्र का आज यानी शुक्रवार को पांचवां दिन है। तीन तलाक का मुद्दा पिछले कई सालों से देश की राजनीति में अहम मुद्दा बना हुआ है। मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाने के मकसद से शुक्रवार को संसद में एक बार फिर तीन तलाक विधेयक पेश किया गया। बता दें 17वीं लोकसभा के गठन के बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला बिल है। तीन तलाक बिल के पक्ष में 186 वोट और विरोध में 74 वोट पड़े।

सदन में हंगामों के बीच केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में यह बिल पेश किया। इस विधेयक के पेश होने के बाद कांग्रेस ने इसके कई प्रावधानों पर विरोध दर्ज कराया है। साथ ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस विधेयक को संविधान का उल्लंघन करने वाला बताया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, ‘आपको मुस्लिम महिलाओं से इतनी मोहब्बत है तो केरल की महिलाओं के प्रति मोहब्बत क्यों नहीं है? आखिर सबरीमाला पर आपका रूख क्या है?’ साथ ही ओवैसी ने इस बिल को आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन बताया है। इनके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस बिल का विरोध किया। थरूर ने कहा कि, ‘तीन तलाक बिल मुस्लिम परिवारों के खिलाफ है। हम इस बिल का समर्थन नहीं करते। एक समुदाय के बजाय सभी के लिए कानून बनाना चाहिए। विधेयक पर सोमवार को चर्चा होगी।’

हंगामों को देखते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि, ‘पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में बिल पास हुआ था। राज्यसभा में बिल अपूर्ण था लेकिन लोकसभा भंग होने के चलते बिल खत्म हो गया। लिहाजा इस बार हम नया बिल लेकर आए। नए बिल में सुधार के लिए बदलाव किया। हम सांसद हैं। हमारा काम कानून बनाना है और जनता ने हमें कानून बनाने के लिए चुना है। कानून पर बहस और व्याख्या अदालत में होती है। लोकसभा को अदालत न बनाएं। यहां किसी भी महिला को तलाक, तलाक, तलाक बोलकर उसके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है।’

गौरतलब है कि मई में 16वीं लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था क्योंकि यह विधेयक राज्यसभा में लंबित था। बता दें लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने के बाद यदि राज्यसभा में वह लंबित रह जाता है तो ऐसी स्थिति में निचले सदन (लोकसभा) के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है।

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