दिल्ली एम्स के 64 डॉक्टरों ने पेट और कूल्हे से आपस में जुड़ी दो बहनों को किया अलग, 24 घंटे से ज्यादा चली सर्जरी

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सीय जगत में नया रिकॉर्ड कायम किया है। साढ़े 24 घंटे की जटिल मैराथन सर्जरी के बाद 64 डॉक्टरों की टीम ने कूल्हे और पेट से जुड़ी दो जुड़वां बहनों को अलग करने में कामयाबी हासिल की है। एम्स के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दो बच्चे एम्स में भर्ती कराए गए थे। केस गंभीर देखते हुए एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सर्जरी करने के तत्काल निर्देश दिए। फिर शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे बच्चों की सर्जरी शुरू हुई और शनिवार को सुबह नौ बजे के बाद तक जारी रही। 24 घंटे सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को अलग कर दिया गया। सर्जरी में 64 स्वास्थ्य कर्मियों ने योगदान दिया।

इन दोनों बच्चियों का इलाज एम्स के पीडिएट्रिक्स सर्जरी में शुरू किया गया। बता दें पिछले डेढ़ साल से ये बच्चियां एम्स में ही भर्ती थीं। सूत्रों के अुनसार, जब दोनों को भर्ती किया गया था, वजन काफी कम था और दोनों इस मैराथन सर्जरी को झेल पाने के लिए फिट नहीं थीं। फिर एम्स के डॉक्टरों ने बच्चियों की कई प्रकार की जांच की और जो भी दिक्कतें आई उसे उन्होंने दूर कर दोनों को सर्जरी के लिए तैयार किया।

डॉक्टर का कहना है कि कम उम्र के बच्चों में लंबी सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया देना एक बड़ा चैलेंज है, इसलिए एनेस्थीसिया के अनुसार भी दोनों बच्चों को तैयार किया गया। एम्स के पीडिएट्रिक्स सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडिएट्रिक्स कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, सीटीवीएस के अलावा रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ समेत 64 से ज्यादा लोगों की टीम ऑपरेशन में जुटी रही।

इन चुनौतियों ने किया परेशान

ऑपरेशन में व्यस्त मेडिकल टीम को सबसे बड़ी चुनौती का सामना तब करना पड़ा जब दोनों बच्चियों का कूल्हा और पेट से जुड़ाव होने के अलावा उनकी रीढ़ की हड्डी और आंत आपस में जुड़े थे। पैरों की नसें दोनों की एक ही थीं, जिसकी वजह से नई नसें प्रत्यारोपित करना जरूरी हो गया। रक्त संचार भी जरूरी था। ऐसे में नई नस को एहतियात के साथ प्रत्यारोपित किया गया। अलग करने के बाद एक बच्ची को नई त्वचा देना भी चुनौती था। बच्ची की मां से टिश्यू लेकर प्रत्यारोपित किए गए।

ऐसे दिया गया ऑपरेशन को अंजाम

सबसे पहले प्लास्टिक सर्जन ने त्वचा को हटाया। फिर पीडियाट्रिक सर्जनों की टीम ने जुडे हुए हिस्से को अलग किया। इसके बाद कार्डियक और थेरोसिक सर्जरी के डॉक्टरों ने रक्त वाहिकाओं को ठीक कर जोड़ा। रात के तीन बजे तक सर्जरी चली फिर प्लास्टिक सर्जरी आदि का काम सुबह करीब नौ बजे तक चला।

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