पिछले 270 सालों से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं बुंदेला राज परिवार और सैयद सालार परिवार, जानें इनकी मित्रता की कहानी

datiya royal family

चैतन्य भारत न्यूज

दतिया. हम आज आपको दो ऐसे पूर्व राज परिवारों के बारे में बता रहे हैं जो धर्म की सभी बंदिशों को तोड़कर पिछले कई सालों से परिवार के जैसे मिल-खुलकर रह रहे हैं। हम बात कर रहे हैं दतिया के बुंदेला राज परिवार और करैरा रियासत के सैयद सालार परिवार के बारे में जो पिछली 10 पीढ़ियों यानी करीब 270 सालों से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बने हुए हैं।

दोनों परिवारों का आपस में इतना खास रिश्ता है कि चाहे घर में कोई मांगलिक कार्य हो या गमी हुई हो, ये कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते हैं। इतना ही नहीं बल्कि वे सूतक तक मानते हैं। 15 अप्रैल 2020 को ही दतिया रियासत के पूर्व महाराजा राजेंद्रसिंह जूदेव का निधन हो गया था। उनके शोक में सैयद सालार परिवार में भी सूतक माना गया था। इतना ही नहीं बल्कि 25 अप्रैल को कर्मकांड के पश्चात् दतिया राज परिवार के संरक्षक महाराज घनश्याम सिंह जूदेव और राज परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ही सैयद परिवार के मुर्तजा अली जैदी ने भी मुंडन कराया।

दोनों ही परिवारों के एक-दूसरे की रस्मों में शामिल होने की कहानी बेहद दिलचस्प है। सन 1750 में दतिया के तत्कालीन राजा राव इंद्रजीत और करैरा रियासत के मुगल फौजदार सैयद सालार असगर अली के बीच आत्मीय मित्रता थी। दिल्ली में मुगलों के कमजोर होते ही करैरा को सैयद सालार ने स्वतंत्र घोषित कर दिया था। फिर मराठों ने करैरा के कई इलाकों पर हमला करना शुरू कर दिया, जिसमें सैयद सालार के 12 में से 10 भाई की मृत्यु हो गई।

फिर सैयद सालार का जीवित भाई करैरा छोड़ मुजफ्फरनगर चला गया। सैन्य बल कमजोर होने के कारण सैयद सालार मराठों से जंग लड़ने में सक्षम नहीं थे इसलिए अपने मित्र राजा इंद्रजीत को करैरा रियासत मराठों को सौंपने की बजाय दतिया राज्य में शामिल कर लेने का प्रस्ताव रखा। राजा इंद्रजीत ने भी यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और फिर वे सैयद सालार को दतिया ले आए। लेकिन करैरा रियासत ज्यादा लंबे समय तक दतिया राज्य के साथ नहीं रह सकी।

फिर मराठा शासकों ने दतिया पर हमला करना शुरू कर दिया तो राजा ने करैरा मराठों को दे दिया और सैयद सालार से कहा, ‘आज से दतिया राज्य पर आपका बराबर का अधिकार है। आप मेरे परिवार के सदस्य की तरह रहेंगे। यह भाईबंदी आने वाली नस्लों तक जारी रहेगी।’ राजा इंद्रजीत ने सैयद सालार का विवाह करवाया। तब से दोनों परिवारों के बीच एक कुटुंब की तरह रिश्ते कायम हैं। सैयद सालार के वंशज दतिया में अब भी करैरा वालों के नाम से जाने जाते हैं। इतना ही नहीं राजा इंद्रजीत ने तो सैयद सालार का निकाह भी करवाया। तब से ही दोनों परिवारों के बीच बने रिश्ते अब तक कायम हैं।

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