परदादा के बैंक ने ही पोते यशोवर्धन बिड़ला को घोषित किया ‘विलफुल डिफॉल्टर’, जानिए पूरा मामला

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चैतन्य भारत न्यूज

कोलकाता के यूको बैंक ने बिड़ला परिवार से जुड़े यशोवर्धन बिड़ला को जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाला (विलफुल डिफाल्टर) घोषित किया है। सूत्रों के मुताबिक, यशोवर्धन की कंपनी बिड़ला सूर्या लिमिटेड पर यूको बैंक का 67.55 करोड़ रुपए कर्जा बकाया है।

यह लोग भी हुए डिफॉल्टर घोषित

बता दें यशोवर्धन यश बिड़ला समूह के चेयरमैन भी हैं। यूको बैंक द्वारा एक सार्वजनिक सूचना जारी की गई है जिसमें यशोवर्धन की तस्वीर प्रकाशित की गई है। इस सुचना में बैंक ने कहा है कि, ‘यशोवर्धन की कंपनी को पूंजी आधारित सुविधाओं के लिए बैंक से 100 करोड़ रुपए कर्ज सीमा मंजूरी दी गई थी। उनपर 67.55 करोड़ रुपए और उस पर लगने वाला ब्याज बकाया है। यह लोन 2013 में एनपीए (नॉन परफार्मिंग लोन) घोषित किया जा चुका है।’ बैंक द्वारा कई नोटिस भेजने के बावजूद यशोवर्धन ने भुगतान नहीं किया है। इसलिए बैंक ने बिड़ला सूर्या लिमिटेड कंपनी के निदेशकों, प्रवर्तकों और गारंटरों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है।

अगले 5 साल नया व्यापार नहीं कर सकते यशोवर्धन

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाला घोषित हो जाने पर लेनदार को बैंकों या फिर वित्तीय संस्थाओं की तरफ से कोई कर्ज सुविधा नहीं दी जाती है। साथ ही उस कंपनी पर पांच साल के लिए नया व्यापार या नई फैक्ट्री शुरू करने पर भी रोक लग जाती है। इसके अलावा कर्जदाता कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर सकता है।

बैंक ने जारी की 655 विलफुल डिफॉल्टर की लिस्ट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता के यूको बैंक ने 655 और भी कंपनियों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है। इस लिस्ट में जूम डेवलपर्स (309.50 करोड़ रुपए), फर्स्ट लिजिंग कंपनी ऑफ इंडिया (142.94 करोड़ रुपए), मोजर बेयर इंडिया (122.15 करोड़ रुपए) और सूर्या विनायक इंडस्ट्रीज (107.81 करोड़ रुपए) जैसे और भी कई प्रमुख नाम शामिल हैं।

परदादा ने की थी बैंक की स्थापना

बता दें जिस यूको बैंक ने यशोवर्धन को डिफॉल्टर घोषित किया है, उसकी स्थापना उनके पूर्वजों ने ही की थी। 1943 में यूको बैंक की स्थापना जी.डी. बिड़ला द्वारा की गई थी। जी.डी. बिड़ला यशोवर्धन के परदादा रामेश्वर दास बिड़ला के भाई थे।

कौन होता है विलफुल डिफॉल्टर?

किसी कर्जदार को विलफुल डिफॉल्टर तब घोषित किया जाता है जब वह जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाता है। यानी कि उसके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त संसाधन है लेकिन फिर भी वह लोन की बकाया राशि नहीं चुकाता है। संपत्ति की बिक्री और पैसे को दूसरे कामों में लगाने के चलते उस व्यक्ति को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया जाता है।

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