पहली बार ठाकरे परिवार का कोई सदस्य किंगमेकर नहीं बल्कि बनेगा ‘किंग’, संभालेगा महाराष्ट्र मुख्यमंत्री पद की कमान

uddhav thackeray

चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही राज्य में सरकार बनाने के लिए उठापटक का दौर जारी था, लेकिन अब शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव में भले ही शिवसेना ने आदित्य ठाकरे को आगे किया हो, लेकिन अब स्थिति कुछ और ही हो गई है। बीजेपी से रिश्ता खत्म होने के बाद अब शिवसेना एक समय पर अपने विरोधी राजनीतिक दल रहे कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना रही है। ऐसे में अब ठाकरे परिवार का कोई सदस्य महाराष्ट्र के लिए किंगमेकर नहीं बल्कि किंग बनने जा रहा है।




ठाकरे के सर सजेगा मुख्यमंत्री का ताज

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार का अलग ही रुतबा और पहचान है। आज भी राज्य में उनकी बराबरी में कोई और परिवार खड़ा नहीं हो सका है। इसकी अहम वजह यह मानी जाती रही है कि भले ही सत्ता इस परिवार के आसपास ही रही, लेकिन यह परिवार सत्ता से हमेशा दूर रहा। ऐसे में अब पहली बार ऐसा होगा जब सत्ता की कमान ठाकरे परिवार के हाथ में ही होगी। बता दें 1966 में उद्धव के पिता बाला साहेब ठाकरे ने शिवसेना की नींव रखी थी। जब तक बाला साहेब ठाकरे राजनीति में सक्रिय रहे तो उद्धव राजनीतिक परिदृश्य से लगभग दूर ही थे। हालांकि उद्धव पार्टी की कमान संभालने से पहले शिवसेना के अखबार ‘सामना’ का काम देखते थे और उसके संपादक भी रहे। बाल ठाकरे की खराब सेहत के चलते साल 2000 के बाद से ही उद्धव ने पार्टी के कामकाज को देखना शुरू कर दिया था।

2002 की जीत से बढ़ा कद

साल 2002 में बीएमसी के चुनावों में शिवसेना को जोरदार सफलता मिली और इसका श्रेय उद्धव ठाकरे को दिया गया। फिर बाल ठाकरे ने अपनी राजनीतिक विरासत उद्धव को सौंप दी। साल 2003 जनवरी में उद्धव को शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया, जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया क्योंकि पार्टी के बाहर लोग उद्धव का नाम तक नहीं जानते थे। लोग उन्हें सिर्फ राज ठाकरे के उत्तराधिकारी के रूप में जानते थे। लेकिन उद्धव को उत्तराधिकारी चुने जाने से आहत राज ठाकरे ने 2006 में पार्टी छोड़ दी और अपनी नई पार्टी- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया।

उद्धव का परिवार

उद्धव के परिवार में उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे के अलावा 2 बेटे आदित्य और तेजस हैं। बड़े बेटे आदित्य ने अपने दादा और पिता की तरह ही राजनीति में कदम रखा। वह शिवसेना की युवा संगठन युवा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। साथ ही मुंबई की वर्ली सीट से विधायक हैं।

सीएम पद के लिए बीजेपी का साथ छोड़ा

साल 2019 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव शिवसेना ने बीजेपी के साथ ही मिलकर लड़ा, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी के बाद दोनों की 25 साल पुरानी दोस्ती टूट गई। इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया है।

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