महाअष्टमी पर उज्जैन नगरी में 27 किमी तक मदिरा की धार से होगी पूजा, 2 हजार साल पुरानी है परंपरा

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चैतन्य भारत न्यूज

उज्जैन. मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि में नगर पूजा की दो हजार साल पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है। महाष्टमी पर नगर की सुख समृद्धि व प्रगति के लिए मदिरा की धार से पूजा होती है। मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने देवियों को खुश करने के लिए नगर पूजा की थी। रविवार को महाअष्टमी पर एक बार फिर उज्जैन नगरी की मदिरा की धार से नगर पूजा होगी।



उज्जैन में यह पूजा अब शासन द्वारा करवाई जाती है। इस पूजा के लिए 10 हजार से ज्यादा रुपए खर्च होते हैं। शासन द्वारा इस पूजा के लिए 299 रुपए हीे खर्च किए जाते हैं और शेष राशि प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी मिलकर खर्च करते हैं। जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर शशांक मिश्र सुबह करीब 8 बजे चौबीसखंभा माता मंदिर में माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाएंगे और इस नगर पूजा की शुरुआत करेंगे। फिर शासकीय अधिकारियों का दल 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए रवाना होगा।

इस पूजा के दौरान नगर में 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर तांबे के पात्र में मदिरा भरकर नगरभर में उसकी धार लगाई जाएगी और भजिए-पूरी अर्पित किए जाएंगे। इस भोग को बड़बाकुल भी कहा जाता है। इस नगर पूजा में करीब 25 बोतल मदिरा का उपयोग होता है। यह पूजा करीब 12 घंटे तक चलेगी। रात करीब 8 बजे गढ़कालिका क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में इस परंपरा का पूजा अर्चना के बाद समापन किया जाएगा। इस खास परंपरा को देखने के लिए दूसरे शहरों से भक्त उज्जैन पहुंचते हैं।

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