जन्मदिन विशेष: विजयाराजे सिंधिया ने किया उमा भारती का लालन-पालन, इनसे हुआ था प्यार लेकिन ‘सांवला रंग’ बना बाधा

चैतन्य भारत न्यूज

पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं उमा भारती का आज 61वां जन्मदिन है। उनका जन्म 3 मई 1959 को टीकमगढ़ के लोधी राजपूत परिवार में हुआ था। उमा कम उम्र में ही साध्वी बनने के बाद राजनीति में आ गईं थीं। उमा अक्सर ही अपने विवादित बयानों के कारण चर्चाओं में रहीं हैं।

राजमाता सिंधिया ने किया लाल-पालन

उमा मात्र छठी तक पढ़ी हैं। उमा का लालन-पालन ग्वालियर घराने की राजमाता विजयराजे सिंधिया ने की थी। वे ही उन्हें पार्टी में लेकर आई थीं। साल 1984 में उमा ने बीजेपी का हाथ थामा था, लेकिन वह अपना पहला चुनाव हार गईं थीं। फिर 1989 के चुनावों में उन्होंने जोर आजमाया और वह जीतकर विधानसभा पहुंच गईं। उमा खुजराहो लोकसभा सीट से 1991 में चुनाव लड़कर चर्चाओं में आ गईं। वह इससे सीट से लगातार तीन बार जीती थीं।

2003 में बनीं मुख्यमंत्री

फिर 1999 में भोपाल संसदीय सीट से लड़कर वे लोकसभा पहुंच गईं। उस दौरान वाजपेयी सरकार ने उमा को केंद्रीय मानव संसाधन, पर्यटन, खेल और युवा मामले, कोयला और खाद्यान्न मंत्रालय की मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी। साल 2003 के चुनाव में उमा भारती के दम पर प्रदेश में भाजपा आई। उमा ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सरकार को बुरी तरह हराया और वे राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं। हालांकि, गलत बयानबाजी के चलते उमा की पार्टी से सदस्यता छिन गई और उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। बाद में भारतीय जन शक्ति पार्टी बनाकर उन्होंने संघर्ष किया।

गोविंदाचार्य से प्रेम करती थीं उमा

उमा एक आत्मविश्वासी राजनीतिज्ञ हैं। साध्वी की वेशभूषा में हमेशा रहने वाली उमा ने अविवाहित रहकर अपना जीवन धर्म को समर्पित कर दिया। हालांकि, आध्यात्म के रास्ते चलने से पहले उमा को कई लोग पसंद भी आए थे। पत्रिका.कॉम के मुताबिक उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि, वे बीजेपी पूर्व विचारक गोविंदाचार्य से प्रेम करती थीं। उमा ने स्वीकार किया था, ‘हां, मैं उनसे (गोविंदाचार्य) प्यार करती थी। मैं शादी करना चाहती थी। हर जगह मैं उनका पीछा करती थी और मुझे लगता था कि वे भी मुझे प्यार करते हैं।’

कर ली थी विवाह की तैयारियां

इस इंटरव्यू से अलग हटकर भी भोपाल में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम मेंके दौरान उमा ने यह स्वीकार किया था कि, साल 1992 में गोविंदाचार्य से विवाह करने की तैयारी में भी थीं। उमा के मुताबिक, आडवाणीजी जी ने भी गोविंदाचार्य की उनसे शादी कराने की इच्छा बताई थी। , उमा के लेकिनभाई स्वामी लोधी ने यह कहते हुए मामला टाल दिया था कि गोविंदाचार्य सांवले (काले) हैं और आकर्षक नहीं।’ बता दें उमा बोलने में इतनी बेबाक हैं कि जब वे बोलना शुरू करती हैं तो अच्छे-अच्छे चुप हो जाते हैं। उनके तर्कों का बड़े-बड़े अफसर भी जवाब नहीं दे पाते हैं।

 

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