सियासत में मंझे हुए बल्लेबाज की तरह जम चुके चेतन चौहान का कोरोना से निधन, राजकीय सम्मान के साथ आज होगा अंतिम संस्कार

चैतन्य भारत न्यूज

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान का रविवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। चेतन चौहान पिछले महीने कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद से ही उनकी हालत खराब होती जा रही थी। पहले उन्हें लखनऊ में भर्ती कराया गया था, जहां अचानक उनकी शनिवार को तबियत बिगड़ने के बाद मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था।

रविवार शाम मेदान्ता मेदांता अस्पताल में चेतन चौहान का देहांत हो गया। यह दुखद खबर आने के बाद मुरादाबाद के ग्राम मुंडापांडे स्थित उनके पैतृक आवास पर मातम छा गया। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। इलाके के लोग भी अपने प्रिय नेता की मौत की खबर सुनकर वहां पहुंचने लगे हैं। साथ ही पुलिस व प्रशासनिक अफसर भी पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार आज (सोमवार) राजकीय सम्मान के साथ हापुड़ के ब्रजघाट में किया जाएगा।

चेतन चौहान की सियासी पारी क्रिकेट से ज्यादा लंबी रही। सलामी बल्लेबाज के रूप में टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के लिए लगभग 12 साल कई मैदानों पर खेले। उन्होंने अंतिम टेस्ट मैच 13 जुलाई 1981 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। 1981 में ही चौहान को अर्जुन आवार्ड से नवाजा गया। क्रिकेट का मैदान छोड़ने के बाद वह सियासत की ओर बढ़े। करीब 29 साल की उनकी सियासी पारी पर रविवार को अचानक विराम लग गया।

क्रिकेट से दूर होने के बाद चेतन चौहान को भाजपा ने साल 1991 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा संसदीय क्षेत्र में उतारा था। इसके बाद चेतन चौहान ने सियासत में पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले ही चुनाव में जीत दर्ज की। चेतन चौहान भाजपा के टिकट पर अमरोहा से लगातार पांच बार चुना लड़े थे। हालांकि, इन चुनावों में वह सिर्फ दो ही बार जीते थे। साल 2017 में अपना पारंपरिक सियासी रुख बदलते हुए विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाया। अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। चेतन चौहान के पास सैनिक कल्याण होमगार्ड, पीआरडी और नागरिक सुरक्षा मंत्रालय था। वह 1991 से लेकर 2020 तक 29 साल अमरोहा की राजनीति में सक्रिय रहे।

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