जयपुर के कनिष्क ने किया सिविल सेवा परीक्षा में टॉप, भोपाल की सृष्टि महिलाओं में अव्वल

UPSC 2019 toppers experience,UPSC 2019 toppers

चैतन्य भारत न्यूज

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा- 2018 का परिणाम शु्क्रवार को घोषित कर दिया। आईआईटी बॉम्बे से बी. टेक कनिष्क कटारिया ने इस परीक्षा में टॉप किया है। महिलाओं में मध्य प्रदेश के भोपाल की सृष्टि जयंत देशमुख अव्वल रहीं। परिणाम की घोषणा के साथ यूपीएससी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, ‘आयोग ने आइएएस, आइपीएस, आइएफएस जैसी सेवाओं में नियुक्ति के लिए कुल 759 (577 पुरुष तथा 182 महिला) उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश की है।’ परिणाम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जारी किया गया है जिस पर सभी उम्मीदवार अपना परिणाम देख सकते हैं।

UPSC टॉपर्स की सूची

1. कनिष्क कटारिया
2. अक्षत जैन
3. जुनैद अहमद
4. श्रेयांश कुमत
5. सृष्टि जयंत देशमुख
6. शुभम गुप्ता
7. कर्नाटी वरूणरेड्डी
8. वैशाली सिंह
9. गुंजन द्विवेदी
10. तन्मय वशिष्ठ शर्मा

सफलता मिलने के बाद टॉपर्स ने शेयर किए अपने अनुभव

माता-पिता और गर्लफ्रेंड से मिला नैतिक समर्थन

कनिष्क कटारिया ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि, यह बेहद आश्चर्यजनक क्षण है। उन्हें यह बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह पहली रैंक हासिल कर पाएंगे। कनिष्क ने आगे यह भी कहा कि, ‘मैं अपने माता-पिता, बहन और अपनी गर्लफ्रेंड का शुक्रगुजार हूं क्योंकि उन्होंने मुझे नैतिक समर्थन दिया। लोग मुझसे एक अच्छा प्रशासक बनने की उम्मीद करते हैं और यही मेरा लक्ष्य है।’ बता दें  27 साल के कनिष्क साउथ कोरिया में सैमसंग कंपनी में एक करोड़ के सालाना पैकेज पर काम करते थे लेकिन उनकी इच्छा देश के लिए कुछ अच्छा करने की थी और इसलिए वह विदेश से लौट आए।

खुद को रोबोट बनाकर पढ़ाई नहीं की

दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले जयपुर के ही अक्षत जैन का कहना है कि, उन्होंने खुद को रोबोट बनाकर पढ़ाई नहीं की, तैयारी के दौरान वो दोस्तों से मिलते या बातचीत करते रहे। बता दें अक्षत ने आईआईटी गुवाहाटी से डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद वह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए थे। पहले प्रयास में अक्षत महज 2 नंबर से सफल नहीं हो पाए थे। जिसके बाद वह पूरी लगन और ईमानदारी से पढ़ाई में लगे रहे और अगले प्रयास में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया।

12वीं में 60% पाने वाले जुनैद बने तीसरे टॉपर

तीसरे नंबर पर रहने वाले उप्र के नगीना कस्बे के जुनैद बताते हैं कि, वे एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार से हैं। जुनैद ने कहा कि, ‘दसवीं और 12वीं की परीक्षा में मेरे 60 फीसदी नंबर आए थे। कॉलेज से निकलकर सेाचा कि अगर समाज को कुछ देना हो तो आइएएस से बेहतर कुछ नहीं होता। घरवालों को इस बारे में बताया तो उनका कहना था कि, इरादा तो बहुत अच्छा है लेकिन तुम पढ़ते नहीं हो। मैंने उसके बाद खुद को पढ़ाई में ही झोंक दिया।’ जुनैद ने 2013 से इस परीक्षा की तैयारी शुरू की और अब जाकर उनके हाथ बड़ी कामयाबी लग गई।

महिलाओं में अव्वल रहीं सृष्टि ने घर पर ही रहकर की तैयारी

महिलाओं में टॉप करने वाली सृष्टि जयंत देशमुख ने पहले प्रयास में ही यह सफलता हासिल की है। सृष्टि ने केमिकल इंजीनियरिंग की थी। इंजीनियरिंग में करियर न बनाकर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला लिया। सृष्टि का कहना है कि, उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे जो हो जाए उन्हें ये परीक्षा पास करनी है और अच्छी रैंक हासिल करनी है। सृष्टि ने कॉलेज के दूसरे-तीसरे साल में ही तैयारी करनी शुरू कर दी थी। आमतौर पर छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करते हैं लेकिन सृष्टि ने घर पर रहकर पढ़ाई की। उनका मानना है कि, ‘घर पर रहने के कुछ फायदे और नुकसान दोनों हैं। फायदा यह है कि घर पर मां के हाथ का खाना खाने को मिलता है और रात में पापा को अपनी परेशानियां बता सकते हैं। घर से दूर रहते हैं तो सारे काम भी खुद करने पड़ते हैं। घर में रहकर पढाई करने से यह डर रहता था कि क्लासेज ना जाने से पढ़ाई में कुछ कमी न रह जाए।’ सृष्टि ने खुद पर भरोसा रखा और वह समय-समय पर इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करती रही। सुखद परिणाम यह रहा कि वह परीक्षा में टॉप कर पाई।

पेट्रोल पंप कर्मचारी के बेटे की 93वीं रैंक

इंदौर के देवास नाका क्षेत्र के पेट्रोल पंप कर्मचारी मनोज सिंह के बेटे प्रदीप सिंह ने परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल की है। प्रदीप ने बीकॉम ऑनर्स की पढाई पूरी करने के बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर दी थी और उन्होंने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर ली। प्रदीप का बचपन से यह सपना था कि, वह कुछ कर कर दिखाए और इसलिए उन्होंने कड़ी मेहनत कर सफलता हासिल की।

Related posts