उत्तराखंड में जलप्रलय, ठंड में पहली बार टूटा ग्लेशियर, वैज्ञानिक भी हैरान, करीब 150 लोगों के मारे जाने की आशंका

चैतन्य भारत न्यूज

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूट गया। इसके बाद धौलीगंगा नदी में जल स्तर अचानक बढ़ गया। जिले में बाढ़ आने से ऋषि गंगा और तपोवन हाइड्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। 150 से ज्यादा लोगों के मलबे में दबने की सूचना हे। चमोली में आपदा से वैज्ञानिक भी हैरान हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ठंड में इस तरह की घटना होना हैरतअंगेज है।

वैज्ञानिक हैरान

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन ज्योलॉजी के वैज्ञानिक डॉ। अमित कुमार का दावा है कि , पहली बार कोई ग्लेशियर ठंड में टूटा है। यह हैरतअंगेज है। हालांकि अभी ग्लेशियर फटने की सही वजह स्पष्ट नहीं है। लेकिन हो सकता है कि जमीन के नीचे कटाव कारण ऐसा हुआ हो।

150 लोगों के मारे जाने की आशंका

उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि, आपदा में 100 से 150 लोगों के मारे जाने की आशंका है। अब तक 3 लोगों के शव मिले हैं। चमोली के तपोवन इलाके में हुई इस घटना से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है। यहां काम करने वाले कई मजदूर लापता हैं। नदी के किनारे बसे कई घर पानी में बह गए हैं। आसपास के गांवों को खाली कराया जा रहा है। ऋषिगंगा के अलावा एनटीपीसी के भी एक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा है। तपोवन बैराज, श्रीनगर डैम और ऋषिकेश डैम भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

पीएम मोदी ने सीएम से की बात, मदद का आश्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर बात की। उन्होंने सीएम से राहत और बचाव कार्य के बारे में जानकारी हासिल की। सभी संबंधित अधिकारी लोगों को सुरक्षित करने में युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। NDRF की टीमें बचाव कार्य के लिए निकल गई हैं। देवभूमि को हर संभव मदद दी जाएगी।

जून 2013 में आई आपदा में 4 हजार से ज्यादा की जान गई थी

16-17 जून 2013 को बादल फटने से रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मची थी। इस आपदा में 4,400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगह पर मारे गए। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे।

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