न बारिश हुई न बर्फ पिघली, फिर क्यों हुई ग्‍लेशियर में तबाही, वैज्ञानिकों ने जताई ये आशंका

चैतन्य भारत न्यूज

चमोली जिले के नीति घाटी स्थित रैणी क्षेत्र में आई भयावह आपदा को लेकर वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि रैणी क्षेत्र में स्नो एवलांच के साथ ही ग्लेशियर टूटने की वजह से ही तबाही हुई है। हालांकि संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि आपदा की असली वजह क्या है? इसका पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों (ग्लेशियोलॉजिस्ट) की दो टीमें जोशीमठ-तपोवन जाएंगी।

वैज्ञानिकों ने बताई यह वजह

वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ। एसके राय का कहना है कि चमोली जिले के नीति घाटी स्थित जिस क्षेत्र में भयावह आपदा आई है उस क्षेत्र में पिछले दिनों बारिश के साथ ही जमकर बर्फबारी हुई थी। ऐसे में ऊपरी क्षेत्राें में भारी बर्फ जमा हो गई। फिर जैसे ही तापमान कम हुआ तो ग्लेशियर सख्त हो गए और उनमें क्षणभंगुरता (अस्थिरता) भी बढ़ती गई। इस बात की भी आशंका है कि जिस क्षेत्र में आपदा आई वहां टो इरोजन होने की वजह से ऊपरी सतह तेजी से बर्फ और मलबे के साथ नीचे खिसक गई होगी। लेकिन फिर भी इस आपदा की असल वजह जल्द ही पता लगाई जाएगी।

150 से ज्यादा लोग लापता

जानकारी के मुताबिक, इस घटना में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। 150 से ज्यादा लापता हैं तो इससे मृतकों की संख्या बढ़ने की पूरी आशंका है। ग्लेशियर का टूटना उत्तराखंड में कोई नई घटना नहीं है लेकिन उसका तबाही में बदल जाना खतरनाक है और ऐसा प्रमुख वजह से है। स्थानीय प्रशासन से लेकर सेना तक अब भी रेस्क्यू में जुटी है और राज्य-केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

ग्‍लेशियर

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