विषु कानी पर्व : प्राचीनतम पर्वों में से एक दक्षिण भारत का नववर्ष, रावण से जुड़ा है इसका इतिहास

चैतन्य भारत न्यूज

भारत में हर जाति और धर्म के लोगों की अपनी अलग-अलग मान्यताएं हैं। यहां हर राज्य में अलग-अलग तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। आज विषु कानी पर्व मनाया जाएगा। यह त्योहार मुख्य रूप से केरल का है। भारत के दक्षिणी राज्य का यह प्राचीनतम पर्वों में से एक है। इस त्योहार का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। इस दिन से केरल में नए साल की शुरुआत मानी जाती है। आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व क्या है।

नववर्ष के रूप में मनाया जाता है ये पर्व

मलयालम पंचांग के मुताबिक, इस दिन सूर्य अपनी राशि में बदलकर ‘मेडम’ (मेष) राशि में प्रवेश करता है। यही से वह एक वर्ष के लिए राशिचक्र की यात्रा प्रारंभ करता है।

radha krishna

विषु पर्व का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विषु पर्व पर भगवान विष्णु जी की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का इसी दिन वध किया था और जगत को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाई दिलाई थी। इसलिए भी भगवान विष्णु और उनके अवतार कन्हैया की पूजा आज के दिन की जाती है।

ravana first pilot,ravana

जब रावण ने सूर्य देव पर लगा थी रोक

अन्य लोककथा के मुताबिक, विषु पर्व सूर्य देवता की वापसी का पर्व है। मान्यता है कि एक बार रावण ने सूर्य देव को पूर्व से निकलने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जब रावण की मृत्यु हुई उसी दिन सूर्य देवता पूर्व दिशा में निकलने लगे। तब से ही विषु पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई।

ऐसे मनाया जाता है विषु पर्व

यह पर्व केरल के अलावा कर्नाटक में भी बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग जल्दी उठकर स्नान ध्यान करते हैं और विषु कानी अर्थात भगवान विष्णु जी के दर्शन के साथ दिन की शुरुआत करते हैं। विषु पर्व पर लोग अपने-अपने घरों में भगवान श्री कृष्णा की मूर्ति के सामने सोने के आभूषण, नये कपड़े, दर्पण, कटहल, खीरा, संतरा, अंगूर, रमायण या भगवद्गगीता रात में 12 बजे रखकर सोते हैं। फिर अगले दिन सुबह उठकर सबसे पहले इनके दर्शन करते हैं। विषु भोजन का आयोजन किया जाता है इसमें 26 प्रकार के शाकाहारी पकवान होते हैं। मान्यता है ऐसा करने से पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है।

ये भी पढ़े…

14 अप्रैल राशिफल : कन्या-कुंभ समेत इन राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ, जानिए कैसा रहगा आपका दिन

आंबेडकर जयंती: 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं का ज्ञान, जानें भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के बारे में खास बातें

 

Related posts