जानिए काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व और विशेषता, जहां साक्षात बसते हैं महादेव

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चैतन्य भारत न्यूज

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में शिवभक्त भोले बाबा के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग कार्य करते हैं। मान्यता है कि, सावन महीने में जो भी भक्त भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का नाम जपता है उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। इन्हीं में से एक है विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग जिसे प्रमुख माना गया है। आइए जानते है विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की विशेषता के बारे में।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व

kashi vishwanath jyotirlinga,kashi vishwanath jyotirlinga ka mahatv,kashi vishwanath jyotirlinga ki viseshtaभगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का नौवां स्थान है। कहा जाता है कि, काशी नगरी देवों के देव महादेव के त्रिशूल पर बसी है। सावन के सोमवार में यहां जलाभिषेक करने का अपना एक अलग ही महत्व है। काशी विश्वनाथ मंदिर का छत्र सोने का है। लोगों का कहना है कि, मंदिर पर पहले नीचे तक सोने लगा था लेकिन अंग्रेजों ने इस सोने को निकाल लिया था। केवल छत्र पर ही अब सोना रह गया है। मान्यता है कि सोने के छत्र के दशर्न करने मात्र से लोगों की मान्यताएं पूरी हो जाती हैं।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की विशेषता

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मान्यता है कि काशी में लगभग 511 शिवालय प्रतिष्ठित थे। इनमें से 12 स्वयंभू शिवलिंग, 46 देवताओं द्वारा, 47 ऋषियों द्वारा, 7 ग्रहों द्वारा, 40 गणों द्वारा तथा 294 अन्य‍ श्रेष्ठ शिवभक्तों द्वारा स्थापित किए गए हैं। सावन में विश्वनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जीवन के कई कष्टों से इंसान मुक्त हो जाता है। काशी विश्वनाथ में की जाने वाली आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां दिन में पांच बार आरती आयोजित की जाती है। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां भगवती विराजमान हैं। दूसरी ओर भगवान शिव वाम (सुंदर) रूप में विराजमान हैं। इसीलिए काशी को मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है।

कहां है और कैसे पहुंचे विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

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यह ज्योतिर्लिंग वाराणसी के मुख्य शहर में स्थित है, इसलिए यहां बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हवाई मार्ग : बाबतपुर विमानक्षेत्र (लाल बहादुर शास्त्री विमानक्षेत्र) शहर के केन्द्र से 24 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित है और इस एयरपोर्ट से चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, खजुराहो, बैंगकॉक, बंगलुरु आदि देशीय और अंतर्राष्ट्रीय शहरों के लिए विमान मिलते हैं।

रेल मार्ग : वाराणसी में कई रेलवे स्टेशन है। जबकि वाराणासी सिटी स्टेशन मंदिर से केवल 2 किमी की दूरी पर स्थित है। मंदिर पहुंचने के लिए आप रेलवे स्टेशन से ऑटो रिक्शा या साइकिल रिक्शा ले सकते हैं।

सड़क मार्ग : वाराणसी सभी राजमार्गों से जुड़ा हुआ है। एन.एच.-2 दिल्ली-कोलकाता राजमार्ग वाराणसी नगर से निकलता है। इसके अलावा एन.एच.-7जो भारत का सबसे लंबा राजमार्ग है, जो वाराणसी को जबलपुर, नागपुर, हैदराबाद, बंगलुरु, मदुरई और कन्याकुमारी से जोड़ता है।

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