वृंदावन : श्री बांकेबिहारी ने लाखों भक्तों के साथ खेली होली, गुलाल से सरोबार हुए श्रद्धालु

चैतन्य भारत न्यूज

रंगभरनी एकादशी के दूसरे दिन भी भारतीय संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलीं। वृंदावन में ठाकुरजी श्री बांकेबिहारी ने अपने मंदिर में देश-दुनिया के कोने-कोने से आए करीब चार से पांच लाख भक्तों के साथ रंगभरी होली खेल रहे थे।

5 दिन तक रोजाना खेली जाएगी होली

वृंदावन में भक्त लट्ठमार, फूलों और रंगों की होली खेलते दिखे। बुधवार से शुरू हुए होली महत्व अब पांच दिन तक हर रोज सुबह से दोपहर दो बजे तक चलेगा। बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार, श्रीबांकेबिहारी मंदिर में रंग की होली रंगभरनी एकादशी से शुरू होती है। इसी परंपरा के तहत रंगों की होली खेली गई। यह दौर लगातार पांच दिन तक चलेगा। हालांकि पहले दिन सुबह के समय गुलाल की होली हुई और शाम को फूलों क होली।

ठाकुर जी के लिए टेसू के फूलों का रंग

होली पर ठाकुर श्री बांकेबिहारी के लिए खास रंग तैयार किया गया। अपने आराध्य के लिए सेवायतों ने टेसू के फूलों से रंग तैयार किया है। इसमें केसर और फिटकरी का उपयोग किया गया है। टेसू के फूल और केसर अलग-अलग स्थानों से मंगाए गए हैं। श्रीनाथ गोस्वामी बताते हैं कि ठाकुरजी को ध्यान में रखते हुए रंग तैयार किया जा जाता है। टेसू के फूलों का यही रंग भक्तों पर डाला जाता है। विगत दो दिन से रंग बनाने का काम चल रहा था।

यहां 40 दिन तक मनाई जाएगी होली

बता दें ब्रज में करीब 40 दिनों तक होली मनाई जाती है। इसकी शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। बसंत पंचमी को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में गुलाल उड़ाने से साथ ही ब्रज में होली का आगाज हो जाता है। उसके बाद रंगभरी एकादशी में भक्त अपने आराध्य संग गुलाल और रंग की होली खुलकर खेलते हैं। इस बार रंगभरी एकादशी के दो दिन होने के चलते बुधवार को भी बांके बिहारी मंदिर में रंगों की होली शुरू हो गई।

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