बचपन में लकड़ियां बीना करती थीं, अब 21 साल बाद मीराबाई चानू ने देश को दिलाया वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. मीराबाई चानू ने ओलंपिक खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में पदक का भारत का 21 साल का इंतजार खत्म किया और 49 किग्रा स्पर्धा में रजत पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक में देश का खाता भी खोला। यह पहली बार है, जब भारत ने ओलंपिक के पहले दिन पदक जीता। देश के लिए मेडल जीतने के बाद मीराबाई चानू बहुत खुश हैं। मीराबाई चानू ने भांगड़ा कर मेडल का जश्न मनाया।


उन्होंने मेडल जीतने के बाद कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैंने मेडल जीता। पूरा देश मुझे देख रहा था और उन्हें उम्मीदें थीं, मैं थोड़ा नर्वस थी लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की ठान ली थी।।।मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की थी। मैंने गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश की, मैं गोल्ड नहीं जीत पाई, लेकिन मैंने सच में कोशिश की। जब मैंने दूसरी लिफ्ट किया, तो मुझे समझ में आ गया कि मैं मैडल जरूरी जीतूंगी।”


ओलंपिक में पदक जीतने पर उनकी इस उपलब्धि पर देश में जश्न का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मीराबाई चानू को ओलंपिक में रजत पदक जीतने पर बधाई दी। अपने बधाई संदेश में पीएम मोदी ने कहा, इससे अच्छी शुरूआत नहीं हो सकती, भारत उनके शानदार प्रदर्शन से उत्साहित है, उनकी सफलता हर भारतीय को प्रेरित करती है।


चानू से इस स्पर्धा में मेडल की उम्मीद थी जिस पर वह खरी उतरीं। उन्होंने 49 किग्रा कैटेगरी में 87 किलो, जबकि क्लीन एंड जर्क में 115 किलोग्राम भार उठाया। इस तरह उन्होंने कुल मिलाकर 202 किलोग्राम भार उठाया। इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में देश को भारोत्तोलन में कांस्य पदक दिलाया था।


मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव में हुआ था। शुरुआत में मीराबाई का सपना तीरंदाज बनने का था, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर चुनना पड़ा। मीराबाई का बचपन पहाड़ से जलावन की लकड़ियां बीनते बीता। वह बचपन से ही भारी वजन उठाने की मास्टर रही हैं।

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