हड़ताल के बीच बंगाल में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल समेत 43 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, HC ने ममता को लगाई फटकार

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चैतन्य भारत न्यूज

पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई मारपीट के बाद शुरू हुई हड़ताल की आंच देश के बाकि राज्यों में भी पहुंच गई है। बंगाल के डॉक्टर्स के समर्थन में दिल्ली के साथ ही मुंबई, पंजाब, केरल, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश में भी डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार से नाराज होकर अब तक 43 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें नील रत्न सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल भी शामिल हैं।

बता दें कि, 10 जून को अस्पताल में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को लेकर दोनों प्रोफेसरों ने यह कदम उठाया है। प्रोफेसर सैबाल कुमार मुखर्जी ने एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कोलकाता के प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिटेंडेंट और प्रोफेसर सौरभ चट्टोपाध्याय ने वाइस-प्रिंसिपल पद से इस्तीफा दे दिया है। पश्चिम बंगाल में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने ममता सरकार को कहा है कि, ‘वह जल्द से जल्द हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से बातचीत करे और इस मामले को सुलझाए।’

हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने शुक्रवार को काम करने से मना कर दिया है। अस्पतालों में ओपीडी बंद होने से मरीजों का बुरा हाल हो रहा है। बता दें नील रत्न सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद से ही सभी डॉक्टर्स गुस्से में हैं। देशभर के सभी सरकारी और निजी डॉक्टरों से शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल में शामिल होने की अपील की गई है। यह हड़ताल दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) बुलाई है। हड़ताल का असर एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में भी देखने को मिलेगा। दिल्ली के एम्स अस्पताल के बाहर मरीजों की भीड़ लग गई। एम्स आए मरीजों से किसी और अस्पताल में जाने को कहा जा रहा है।

फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एफओआरडीए) ने 15 जून को भी देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल के दौरान सभी ओपीडी बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री ममता ने चार घंटे में हड़ताल खत्म करने का अल्टीमेटम दिया था बावजूद इसके डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने तो ममता पर धमकी देने का आरोप तक लगा दिया। इसके बाद ममता ने डॉक्टरों से मरीजों की देखभाल करने का निवेदन किया।

यह है मामला

दरअसल, 10 जून को शाम करीब साढ़े पांच बजे नील रत्न सरकार मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्साए परिजन वहां मौजूद डॉक्टरों को गालियां दी और मारपीट भी की। डॉक्टरों ने कहा कि, ‘जब तक परिजन हमसे माफी नहीं मांगते हम प्रमाण पत्र नहीं देंगे।’ इसके कुछ ही देर बाद भीड़ हथियारों के साथ हॉस्टल पहुंच गई और हमला करना शुरू कर दिया। इस हिंसा में दो जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हुए और कई डॉक्टरों को चोट भी आई। घटना के बाद ममता ने हड़ताल वाले डॉक्टरों की निंदा की जिसके बाद यह मामला बढ़ता चला गया।

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