47 साल पहले हुआ था शिमला समझौता, बेनजीर की खूबसूरती इस समझौते पर पड़ गई थी भारी

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चैतन्य भारत न्यूज

47 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ था। 1971 में भारत और पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला में एक संधि पर हस्ताक्षर हुए जिसे शिमला समझौता के नाम से जाना जाता है। शिमला समझौता के लिए भारत की तरफ से इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो शामिल हुए थे।

दोनों देशों के बीच सुधार के लिए 2 जुलाई, 1972 को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक संधि पर हस्ताक्षर किया गया जिसे शिमला समझौता के नाम से जाना जाता है। इस दौरान युद्ध से उत्पन्न हुए मुद्दों पर दोनों देशों के प्रमुख और उच्च अधिकारियों ने मिलकर चर्चा की थी। इसके अलावा युद्ध बंदियों की अदला-बदली, पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश को अलग देश की मान्यता, भारत और पाकिस्तान के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना, व्यापार फिर से शुरू करना और कश्मीर में नियंत्रण रेखा स्थापित करना जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।

शिमला समझौता की खास बातें-

  • दोनों देश सभी विवादों और समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान करेंगे। यह सीधी बातचीत होगी और इसमें कोई मध्यस्थ या तीसरा पक्ष नहीं होगा।
  • यातायात की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी ताकि दोनों देशों के लोग असानी से आ जा सकें।
  • शिमला समझौते के बाद भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा कर दिया।
  • जहां तक संभव होगा व्यापार और आर्थिक सहयोग जल्द ही फिर से स्थापित किए जाएंगे।
  • 1971 में हुए युद्ध में भारत द्वारा कब्जा की गई पाकिस्तान की जमीन वापस कर दी गई थी।
  • शांति के हित में दोनों देशों की सरकारें इस बात को लेकर सहमत हुई कि भारत और पाकिस्तान दोनों की सेनाएं अपने-अपने प्रदेशों में वापस चली जाएंगी।
  • दोनों देशों ने 17 सितंबर, 1971 की युद्ध विराम रेखा को नियंत्रण रेखा के रूप में मान्यता दी और साथ ही यह भी तय हुआ कि इस समझौते के बीस दिन के अंदर सेनाएं अपनी-अपनी सीमा से पीछे चली जाएंगी।
  • समझौते में यह भी तय किया गया कि भविष्य में दोनों सरकारों के आपस में अध्यक्ष मिलते रहेंगे और इस बीच अपने संबंध सामान्य बनाने के लिए दोनों देशों के अधिकारी बातचीत करते रहेंगे।
  • समझौते के कुछ ही दिन बाद भुट्टो इससे अनौपचारिक तौर पर मुकर गए थे। नेशनल असेंबली में उन्होंने कहा था कि, भारत के हाथ में सारे पत्ते थे, फिर भी उन्होंने हमारे साथ बराबरी का समझौता करना पड़ा। इसे उन्होंने अपनी जीत करार दिया था।

उस समय समझौते से ज्यादा चर्चा बेनजीर की हुई थी, जो अपने पिता के साथ भारत आईं थीं। दरअसल इस बैठक में पहले बेगम भुट्टो जुल्फिकार के साथ शिमला आने वाली थीं लेकिन ऐन मौके पर उनकी तबियत खराब हो गई। तब अमरीका से गर्मियों की छुट्टी में बेनजीर पाकिस्तान आईं हुईं थीं। ऐसे में बेगम भुट्टो ने अपनी 19 वर्षीय बेटी बेनजीर से शिमला चलने को कहा था। 28 जून से 2 जुलाई के बीच बेनजीर कि खूबसूरती से लेकर उनके कपड़ों तक की खूब चर्चाएं हुई थी। बेनजीर को देखने के लिए शिमला में लोगों की भीड़ जमा हो जाती थी।

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