ज्योतिष दृष्टि से कैसा रहेगा नेताओं के लिए नया साल?

                                                          लेखक परिचय
                                                       पी.पी.एस. चावला
ज्योतिष गणनाएं, राशिफल का करीब तीस साल का अनुभव। 80 के दशक से इस विषय में लेखन कर रहे हैं। आपके लेख  ”प्लेनेट्स एंड फॉरकास्ट” पत्रिका में प्रकाशित होते रहे हैं। इसमें प्रकाशित लेख ज्योतिष में परिवर्तन योग और जन्मस्थ शनि पर गोचरस्थ शनि के संचार का प्रभाव ने अच्छी ख्याति अर्जित की थी।

नए साल 2019 का आगाज हो चुका है। हर व्यक्ति के मन में नए साल को लेकर नई आशाएं, उम्मीदें होती हैं। राजनेता भी इनसे अछूते नहीं हैं। उनकी उम्मीदों से करोड़ों लोगों की आशाएं- सपने जुड़े होते हैं, इसलिए उन पर नजर भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। देश के बड़े नेताओं की कुंडली और यह साल उनके लिए किस तरह की सफलताएं लेकर आएगा, इस पर ज्योतिष विज्ञान क्या कहता है, इस पर नजर डालते हैं।

 

भारतीय जनता पार्टी

भाजपा की कुंडली में सूर्य बृहस्पति का परिवर्तन योग बन रहा है और सूर्य बृहस्पति दशा में 2014 के चुनावों में पार्टी को बहुमत मिल गया। 17 अप्रैल 2012 से 17 अप्रैल 2018 तक यह दशा केंद्र के रूप में पार्टी द्वारा गठित सरकार के लिए बेहद अनुकूल साबित हुई। मई 2014 के साथ-साथ कई राज्यों जैसे राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़ (नवंबर 2013), गुजरात (दिसंबर 2017) के विधानसभा चुनावों में सफलता मिली।

सूर्य शनि दशा ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में एक झटका दिया, जहां ‘आप’ पार्टी ने चुनावों में भाग लिया और सरकार का गठन किया।

चंद्रमा दशा 17 अप्रैल 2018 को शुरू हुई और यह दशा पहले से ही संकेत दे रही है कि पार्टी के लिए आगे क्या है। कुंडली में हालांकि विभिन्न योगों का निर्माण किया है जैसे गुरु, मंगल योग, गुरु शनि, योग (शुभ नहीं) चंद्र मंगल योग आदि।और जब हम चंद्र कुंडली को देखते हैं तो ग्रहों की स्थिति बहुत मजबूत प्रतीत होती  है। चंद्रमा 12 वें घर से शुक्र से दृष्ट है जो कि मालव्य  योग बना रहा है। शनि बृहस्पति 10 वें घर में स्थित हैं, राहू और मंगल 9 वें घर में हैं (डिग्री के आधार पर)।

केंद्र में बुध, बृहस्पति और शुक्र का स्थान चंद्र से सभी लाभकारी ग्रह विशिष्ट  योग बनाते हैं। चंद्रमा 2 वें भाव के स्वामी हैं  (द्वितीशेश, मार्केश), 6 वें भाव में चंद्रमा वृश्चिक राशि में वक्री है। चंद्रमा से 2 – 12 वें घर में किसी भी ग्रह की उपस्थिति नहीं है या चंद्रमा केमुद्रम योग बनता है  जो अकेलेपन और घटते समर्थन को दर्शाता है। जो लोग पार्टी से लाभान्वित हुए थे वे उन्हें छोड़ सकते हैं। 6 वां घर शत्रुओं और विरोधियों और दुर्दशा का घर है।

2018 की दूसरी तिमाही में और बाद में घोटालों या अन्य कठिन आरोप लगेंगे जिन्हे झेलने में अत्यंत परेशानी आ सकती है। कर्क की  नारायण दशा  6 अप्रैल 2018 से शुरू होगी जो अच्छी नहीं है।

भाजपा की वर्ष कुंडली में सूर्य की मुद्रा दशा 6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक चलेगी जो कि वर्ष कुंडली में दशम भाव में स्थित है, यद्यपि मजबूती दर्शाती है परन्तु इस वर्ष द्विजन्मा योग भी बन रहा है जिसे शुभ नहीं कहा जाता। योगिनी में उल्का सिद्धा की दशा 29 सितम्बर 2018 से 29 नवम्बर 2019 तक चलेगी जो कि शुभ एवं सफलता कारक होना चाहिए थी परन्तु इस दौरान पार्टी 3 प्रदेशों में चुनाव हार चुकी है अत: इसकी अपेक्षा चंद्र की महादशा के प्रभाव ज्यादा परिलक्षित हो रहे हैं।

2019 में मार्च अप्रैल में मंगल वृषभ राशि से भ्रमण करेंगे जो कि वृश्चिक राशि स्थित चन्द्रमा पर दृष्टि करेंगे जिससे एवं मजबूती प्रदान करेंगे। नवमांश कुंडली में मंगल एवं राहू 12वें भाव में स्थित हैं मंगल सप्तमेश एवं द्वादशेश है जिस कारण से सहयोगी दल अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए दबाव की राजनीति अपनाएंगे।

चंद्र, मंगल, गुरु की प्रत्यन्तर्दशा 1 अप्रैल से 29 अप्रैल तक चलेगी जो शुभ है एवं इस कारण से भाजपा को कुछ हद तक 2018 की विफलताओं से कुछ  उबरने  के संकेत हैं परन्तु चूंकि मंगल चलित कुंडली में द्वितीय भाव में है और मंगल द्वितीय भाव में निष्फल बन जाता है अत: इसमें विशेष उपलब्धि की सम्भावना कम हो जाती है। इसके पश्चात् चंद्र मंगल शनि की दशा चलेगी जो कि नवमांश कुंडली में शनि के अष्टम भाव में होने के कारण कमजोर है। यद्यपि दशमांश कुंडली में मकर लग्नेश होकर पंचम शुक्र की राशि वृषभ में होने से कुछ ठीक है। पाठक ध्यान देंगे कि शिवराज सिंह की जन्म कुंडली में शनि धनु राशि में अष्टम भाव में स्थित होने से शनि की महादशा के पहले चुनाव में ही प्रदेश में सरकार हट गई।

नरेंद्र मोदी
केंद्र में स्वामी और कोणों के स्वामी की उपस्थिति अद्वितीय है। प्रथम भाव का स्वामी मंगल, प्रथम भाव में नौवें घर (केंद्र) के चंद्रमा के साथ है। रुचक योग 4 वें घर में कुंभ राशि में बृहस्पति 5 वें घर (कोना) का स्वामी है। सातवें घर का स्वामी शुक्र 10 वें घर में 4 वें घर के स्वामी के साथ मौजूद है। बुध 11 वें घर में सूर्य और केतु के साथ कन्या राशि में उच्च का है; दुर्बल है और इसलिए केतु है लेकिन केतु अनुकूल 11 वें घर में मौजूद है। चार्ट ष्ठ-9 चार्ट में मंगल नीचस्थ है।

चंद्रमा दशा के प्रभाव में चंद्रमा की राशि में बृहस्पति के गोचर का समय है  जो अच्छा नहीं है। परंतु 23 दिन की संक्षिप्त अवधि के लिए गुरु 31 मार्च 2019 से 22 मार्च तक धनु राशि में रहेंगे जो बेहतर समय हो सकता है।
डी -9 चार्ट में मंगल की मकर में सूर्य बुध पर उच्च स्तर दृष्टि है। मंगल स्वयं वृश्चिक में बृहस्पति से इस पर उच्च दृष्टि रखता है। शनि शुक्र डी -10 चार्ट में परिवर्तन करता है जो कि प्रबल राजनीति योग कारक है।  शुक्र और सूर्य ने उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राजयोग दिया है।
चंद्रमा बृहस्पति दशा में वे भारत के प्रधानमंत्री बने जो जन्म कुंडली में गजकेसरी योग बना रहे हैं। चंद्रमा केतु दशा जनवरी 2019 से शुरू होगी और अगस्त 2019 तक चलेगी। चंद्र केतु युति चाहे चार्ट में या दशा में कहा जाए कि ग्रहण योग चंद्रमा केतु द्वारा निर्मित किया गया है। चंद्रमा केतु कुछ गंभीर परेशानियां और चिंताएं दे सकते हैं। धैर्य, स्नेह और देखभाल की आवश्यकता है। यह केतु, हालांकि जन्म कुंडली में 11 वें घर में है, लेकिन यह दुर्बल है और चंद्रमा की वृश्चिक राशि में विराजित है, जो केतु की उच्च राशि है। मार्च 2019 में केतु धनु राशि से उच्चराशि में प्रवेश करेगा। उद्देश्य और लक्ष्य अधिक हो सकते हैं, लेकिन ग्रहण इसे सार्थक बनाने से रोक सकता है। (यह कुंडली चूंकि अप्रामाणिक है अत: जन्म तारीख के आधार पर चंद्र कुंडली से विवेचन ज्यादा उचित है एवं साथ ही किसी महत्वपूर्ण निष्कर्ष के लिए उचित नहीं है)

अमित शाह
राहू सूर्य का प्रभाव 2 मई 2019 तक रहेगा। उसके पश्चात् राहू चंद्र की दशा चलेगी। चंद्रमा चलित कुंडली में राहु से द्वादश भाव में स्थित है जो कि ज्यादा परिश्रम एवं ज्यादा खर्च एवं अपेक्षाकृत कम सफलता दर्शाती

है। अशुभ प्रभाव 8 मार्च से कम होने लगेंगे। 7 मार्च से राहू का गोचर चंद्र राशि मेष से तृतीय में मिथुन राशि में  होगा जो कि लग्न से दशम रहेगा तथा प्रभावोत्कारक रहेगा । बृहस्पति का गोचर अप्रैल 2019 में 23 अप्रैल (धनु) तक अनुकूल रहेगा। योगिनी दशा 9 अगस्त तक प्रतिकूल रहेगी, हालांकि 5 अप्रैल 2019 से इसका प्रभाव कम हो जाएगा। गोचरस्थ बृहस्पति मार्च अप्रैल 2019 के दौरान जन्मस्थ बृहस्पति के साथ षडाष्टक का निर्माण करेगा, जो असाधारण सफलता पाने के लिए सहायक नहीं हो सकता है। राहू डी -10 चार्ट में मिथुन राशि में 8 वें घर में है। बृहस्पति डी -9 और डी -10 चार्ट दोनों में नीचस्थ है डी -10 चार्ट में यह 5 वें घर में मीन राशि में शनि के साथ घरों का परिवर्तन करता है। गुरु की महादशा शुभ रहने के संकेत नहीं दिखाते हैं।

नितिन गडकरी
नितिन गडकरी का जन्म 27 मई 1957 को हुआ था। जन्मतिथि में मेष राशि का चंद्रमा बुध केतु है, जो बुध के साथ

सूर्य के साथ वृष राशि में मंगल का स्वामी है। वृष राशि में शनि का वृश्चिक राशि में और राहू तुला राशि में है। इस चार्ट में कुछ भी खास नहीं लगता है, लेकिन डी -9 चार्ट में मेष राशि में सूर्य मंगल है, सूर्य उच्च राशि का है और स्वयं की राशि में मंगल, राहू केतु वृष राशि में स्थित हैं। बुध बुध की कन्या राशि में उच्च का है। बृहस्पति स्वयं की राशि धनु में शनि के साथ स्थित है। डी -10 चार्ट में तुला राशि में बुध से शुक्र कन्या राशि में परिवर्तन योग बना रहा है । मंगल स्वयं मकर राशि में उच्च का और शनि मकर राशि में, सूर्य बृहस्पति वृषभ राशि में और राहू केतु मिथुन धनु में उच्चस्थ हैं। अप्रैल 2019 में शनि के साथ धनु में बृहस्पति का गोचर और अप्रैल 2019 से मिथुन धनु राशि में राहू केतु बहुत अच्छे हैं। बृहस्पति, सूर्य, चंद्रमा, मंगल की दशा भी बहुत अनुकूल होने वाली है। बृहस्पति सूर्य की यह दशा 2019 की दूसरी तिमाही में कुछ समय बाद शुरू होने की संभावना है या बाद में जो उसके लिए बहुत अनुकूल होना चाहिए।

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का जन्म 15 सितंबर 1939 को हुआ। उपलब्ध जन्म कुंडली में सूर्य स्वराशि स्थित लग्न में बुध के साथ चंद्र, शुक्र

कन्या राशिगत द्वितीय भाव में गुरु जो कि अष्टमस्थ मीनराशि में हैं उस पर दृष्टि करते हैं शुक्र की दृष्टि गुरु पर उच्च है गुरु पंचमेश भी हैं अत: विदेश में शिक्षा पाने का योग बना। राहू तृतीयस्थ हैं मंगल मकर राशि में छठवें भाव में उच्च हैं और शनि जो कि नवम भाव में मेष राशि में है उसके साथ परिवर्तन योग बना रहे हैं। शनि केतु की युति भी है और मंगल से दृष्ट है जो कि मंगल की राशि में है। बुध में शनि में राहू की अन्तर्दशा 10 मार्च 2019 से 6 अगस्त 2019 तक रहेगी जिससे राजनीति में सफलता मिलेगी। उस समय शनि से राहू तृतीय रहेंगे एवं जन्म कुंडली में भी राहू तृतीयस्थ होने से प्रभाव में वृद्धि एवं विरोधियों पर विजय मिलेगी।  दिसंबर से केतु की महादशा रहेगी। केतु नवम भाव में मंगल से दृष्ट होने से प्रभावकारी रहेगा किन्तु नवमांश एवं दशमांश कुंडली में बुध की राशि में द्वितीयस्थ और दशमस्थ होकर कितना लाभकारी रहेगा यह कहना कठिन है।

कांग्रेस पार्टी

दिसंबर, 2018 में तीन राज्यों में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस पार्टी उत्साहित है और लोकसभा चुनाव को लेकर उसकी उम्मीदें बढ़ी हुई हैं।  कांग्रेस की बृहस्पति, शुक्र, बुध की दशा 2 मार्च 2019 से 18 जुलाई 2019 तक चलेगी जो बहुत शुभ नहीं है लेकिन इस अवधि में बृहस्पति, शुक्र, बुध की दशा 29 मार्च से 22 अप्रैल 2019 तक चलेगी जो कि बृहस्पति, शुक्र, बुध के बुरे प्रभावों को नकार सकता है। शुक्र, बुध द्वादशवासा योग का प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है जबकि बुध, शुक्र अनुकूल रूप से द्वितीय योग का निर्माण कर रहा है। तब तक इसका प्रभाव समाप्त हो जाएगा। 18 मार्च 2019 से 8 मई 2019 तक योगिनी दशा में मंगला भद्रिका का प्रभाव रहेगा जो कि गतिविधियों में सुगमता प्रदान करती है। वर्ष के चार्ट में 17 मार्च से 16 मई 2019 तक शुक्र तीसरे घर में वृश्चिक राशि में स्थित है और डी-9 चार्ट में यह कर्क राशि में वर्गोत्तम है। मेष में मेष राशि का मंगल और वृषभ राशि का मंगल कांग्रेस के लिए भी शुभ रहेगा और उनकी स्थिति को मजबूत करेंगे।

राहुल गांधी

राहुल गांधी की जो कुंडली उपलब्ध है, उसके मुताबिक उन पर 15 अप्रैल 2019 तक मंगल की दशा चल रही है और उस बाद राहू की दशा शुरू होगी। राहू राजनीति का कारक है और डी -9 चार्ट में यह दूसरे और डी -10 चार्ट में 10वें घर में है। बुध और शुक्र 9 वें 10वें घर में। राहू दशमांश कुंडली में उच्चस्थ है और मिथुन राशि का ही है। बुध और शुक्र दशमांश कुंडली में नवम एवं दशम भाव में वृषभ एवं मिथुन में स्थित होकर परिवर्तन योग बना रहे हैं। नवमांश कुंडली में भी यह परिवर्तक योग बना रहे हैं पर यह छठवें और दसवें भाव में है।
(यह राशिफल 2019 में चुनावों के आशाजनक परिणाम दिखाता है और राहू, रूश्वक्रष्टक्रङ्घ चुनावी सफलता के लिए कारक हैं। ष्ठ-10 चार्ट में बुध और शुक्र घरों का आदान-प्रदान करते हैं, जो महत्वपूर्ण है। इसी दिन की एक और कुंडली है जो मिथुन लग्न की है, वह 25 अप्रैल 2019 तक मंगल, बृहस्पति, शुक्र की दशा बताता है कि कांग्रेस दशा और भारतीय स्वतंत्रता चार्ट दशा के साथ समन्वय में है। जिससे इन चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है। स्वयं राहुल गांधी की कुंडली में किसी केंद्रीय महत्वपूर्ण भूमिका निभाने संबंधी योग यद्यपि सीधे सरल नहीं दिखते हैं लेकिन वे इस समय एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और राहू की महादशा , जो कि दशमांश कुंडली में दशम भाव में स्थित है वह जरूर कुछ चमत्कार दिखा सकती है।)

प्रियंका गांधी
धनु राशि में सातवें घर में बृहस्पति सूर्य बुध के साथ जन्मे, धनु राशि में हंस योग चंद्रमा वृश्चिक में छठवें घर में, बुध की स्थति अच्छी नहीं है लेकिन मिथुन राशि पर स्वयं की राशि पर दृष्टि है । मंगल 10वें घर में है। 12वें घर में वृषभ राशि में शनि नौवें घर में कुंभ राशि के शुक्र के साथ परिवर्तन कर रहा है। डी -9 नवमसा चार्ट में वरगोत्तमा नवमांश, मिथुन लग्न में बुध, 5 वें घर में तुला नवांश में शुक्र, 9 वें घर में कुंभ नवमेश में शनि, 7 वें घर में सूर्य वरगोतमि 11 वें घर में बृहस्पति राहू, 7 वें में मंगल के साथ धनु राशि में मंगल के साथ परिवर्तन कर रहा है। भाव सभी मजबूत हैं और बहुत शक्तिशाली योग बना रहे हैं। ष्ठ-10 चार्ट 10 वें घर में राहू के साथ गुरु चांडाल योग का निर्माण करता है जो कि अप्रिय विवाद में खींचने का कार्य करता है। मंगल मेष राशि में 2 वें घर में है।

(प्रियंका गांधी की कुंडली से पता चलता है कि वह चुनावों के दौरान शुक्र, शनि, चंद्रमा के प्रभाव में हैं। शुक्र ग्रह डी -9 चार्ट में कुंभ राशि में योगकारक है जिसमें शनि स्थित है। डी -9 में 5 वें घर में बुध मिथुन राशि में है। शनि का गोचर, राहू, केतु, बृहस्पति के इन चुनावों के दौरान बहुत महत्वपूर्ण है। पहली छमाही एक घटनापूर्ण और बहुत महत्वपूर्ण अवधि होगी। वह इस वर्ष में चमत्कारी प्रगति कर सकती हैं। चुनाव अभियान में उसकी उपस्थिति एक बड़ी उपलब्धि बनाने जा रही है। पार्टी में सकारात्मक प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।)

अन्य बड़े नेताओं की कुंडली के बारे में

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार की जन्मकुंडली में 9वें घर में राहू-बृहस्पति सूर्य-बुध के साथ मिल रहे हैं। 10 वें घर में शुक्र और मंगल मीन राशि में हैं। शुक्र मीन राशि के 10वें भाव में उच्च का होकर पंचमहापुरुष योग बना  रहा है जिसका नाम मालव्य योग है। शुक्र दशमांश कुंडली में भी उच्च का है और चौथे घर में भी है। शुक्र नवमांश कुंडली में आठवें घर में स्वयं की तुला राशि में स्थित है जो कि आठवें घर में रखा गया है। शुक्र तीसरे और आठवें स्थान के स्वामी हैं और परिवर्तन योग बना रहा है।

शनि कन्या राशि में चौथे भाव में स्थित है। नौवें घर में कुंभ राशि में बुध के साथ घर (परिवर्तन योग) का निर्माण होता है जो संघर्ष के बाद कठिनाइयों, सफलता का कारण बनता है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण विशेषता झटका लगने के बाद अधिक शक्ति के साथ वापस आना होता है, लेकिन अंत में असफलता ही मिलती है।
राहूः शनि राहू का प्रभाव 3 जनवरी 2019 से 7 जून 2019 तक रहेगा। राहू शनि जन्म पत्रिका में (6-8) षडाष्टक बना रहे हैं लेकिन शनि राहू से 11वें भाव में गोचरस्थ हैं  और राहू शनि से ग्यारहवें और दसवें स्थान में आने वाले चुनावों के लिए बहुत अच्छे हैं।
लेकिन डी -9 चार्ट और डी -10 चार्ट से यह योग शिथिल  हो जाते हैं जो शनि के गोचर से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा लग्न में डी -9 चार्ट में सूर्य के साथ शनि की उपस्थिति और दोनों के संयोजन से 8वें घर में कर्क राशि का प्रवेश होता है। D-10 चार्ट से यह निष्कर्ष निकलता है कि इस बार जोड़-तोड़ और उतार-चढ़ाव सहायक नहीं हो सकते हैं और उन्हें कठिनाइयों का सामना कर कम सफलता पर संतोष करना पड़ सकता है।

उद्धव ठाकरे

कन्या लग्न में जन्म लेने वाले शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के ग्रह- योग राहू के साथ सिंह राशि में चुनाव के दौरान बृहस्पति बुध बृहस्पति के प्रभाव में होंगे।
बृहस्पति

कुंडली में चतुर्थ भाव में धनु राशि में स्थित होकर हंस योग बनाता है और बुध कुंडली

में भद्रिका योग  बनाता है। चंद्रमा से राहु के 11 वें घर में गोचर के साथ उपरोक्त योग, लग्न, शनि और बृहस्पति से 10 वां घर उनकी जन्मस्थ स्थिति के पास गोचर करने से उन्हें अपेक्षित

परिणाम मिलने की

उम्मीद है। वे इन चुनावों में अपनी पार्टी के प्रदर्शन से संतुष्ट होंगे। उनकी पार्टी को इन चुनावों के दौरान बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।

अतिशीघ उनकी कुंडली में गुरु की महादशा शुरू होने को है जिसके दौरान उन्हें महत्वपूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद है।

तीसरे मोर्चे की नेताओं की कुंडली क्या कहती है

ममता बनर्जी

केंद्र में उच्च के बृहस्पति शनि के साथ जन्मे और पांचवें घर में स्थित उच्च के चंद्रमा पर भावेश शुक्र की दृष्टि और भी शुभ है। यह योग ममता बनर्जी को प्रमुख नेता बना रहा है।
शनि को जन्म कुंडली में उच्च का माना जाता है जो कि दसवें घर में स्थित है, शश योग नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण कर रहा है। शुक्र वृश्चिक राशि में 11 वें घर में है और भाव स्पष्ट कुंडली में 10 वें घर में है, इस प्रकार शनि शुक्र 10 वें घर में पहले, चौथे और नौवं घर का स्वामी होकर केंद्र में स्थित है। चंद्रमा भाव स्पष्ट कुंडली में चौथे भाव में है और इस प्रकार शनि शुक्र केंद्र में है मंगल जन्म कुंडली में दूसरे घर में और डी –10 चार्ट में वृश्चिक राशि में सातवें घर में है। यह बलवान है।
शनि सूर्य दशा में अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है अपितु यश तथा राज्य संबंधी कुछ अवरोध होता है। पश्चिम बंगाल के चुनावों में शनि, बुध और शनि शुक्र उनके लिए असाधारण थे। अब शनि सूर्य चल रहा है। सूर्य डी-9 चार्ट में शुक्र के साथ विनिमय कर रहा है। शनि 10 वीं में है व वृषभ राशि में जो बहुत अच्छा है। वह 2019 के चुनावों में सफलता को दोहराने में सक्षम होगा।

के. चंद्रशेखर राव (मुख्यमंत्री, तेलंगाना)

मेष लग्न वृषभ राशि में बृहस्पति के साथ जन्म राशि में, केतु मिथुन राशि में तृतीय भाव में, चंद्रमा कर्क राशि में चौथे घर में शनि, सातवें घर में तुला राशि में, मंगल आठवें घर में वृश्चिक राशि में, राहु नौवें घर में धनु राशि में और 11 वें घर में सूर्य शुक्र के साथ हैं। शनि और शुक्र का परिवर्तन योग बन रहा है जो कि अत्यंत शुभ है।

सूर्य, शनि, बृहस्पति, चंद्रमा, केतु बहुत ही शुभ रूप से डी -9 चार्ट में हैं। यह चार्ट में मौजूद शुभ योगों की पुष्टि करता है। अतः सूर्य वृश्चिक राशि में, शनि सातवें घर में स्वयं की कुंभ राशि में स्थित है। डी-9 चार्ट में 11 वें घर में केतु ध्वजा योग बना रहा है। चंद्रमा आठवें घर में मीन राशि में और मीन राशि का स्वामी बृहस्पति 12 वें घर में चंद्रमा की राशि कर्क में स्थित है  अतः बृहस्पति ने चंद्रमा के साथ परिवर्तन योग बनाया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी कुंडली बहुत मजबूत है। वे विपक्षी एकता या किसी अन्य मंच पर विचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  वर्तमान में राहु शुक्र की दशा चल रही है। वे 23 मार्च 2018 से 23 मार्च 2021 तक राहु शुक्र के प्रभाव में है। वर्तमान में जन्मस्थ राहू से सातवें घर के माध्यम से पारगमन हो रहा है और शुक्र डी -10 चार्ट में राजयोग का निर्माण कर रहा है क्योंकि यह वृषभ राशि में 10 वें घर में  है और राहु बुध के साथ दूसरे घर में है।

डी -10 चार्ट में सिंह राशि में बृहस्पति है। आठवें घर में मीन राशि में अशुभ सूर्य के साथ परिवर्तन करते हुए बुध और राहू 2 के घर में उदित हुए हैं। केतु आठवें घर में शनि के साथ स्थित है। तीसरे घर में तुला राशि में मंगल है और 5 वें में धनु राशि में चंद्रमा है। बृहस्पति की दृष्टि से यह बहुत शुभ हो जाता है।
2019 में राहु शुक्र मंगल की दशा 17 फरवरी 2019 से 20 अप्रैल 2019 तक चलेगी और फिर 2 अक्टूबर तक राहू का प्रत्यंतर चलेगा।

राहू, केतु और बृहस्पति का गोचर जन्मस्थ राशियों से अंशों के आधार पर मजबूत स्थिति में होगा। यह डिग्री वार देखा जाना चाहिए और इस प्रकार राहू, केतु बृहस्पति बहुत मजबूत स्थिति में होगा। मंगल भी मजबूत होगा क्योंकि यह मेष और वृषभ में होगा। नवंबर 2018 से मार्च 2019 के बीच किए गए उनके प्रयासों को सफलता मिलेगी और फरवरी 2019 तक वह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में होंगे। उनकी पार्टी को 2019 के दौरान चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

 

(विशेष: ज्योतिष विज्ञान है और स्पष्ट रूप से मान्यता का विषय है। इस लेख में प्रकाशित विचार, अध्ययन और विश्लेषण लेखक का ही है)

Related posts