जानें कैसे भारतीय WhatsApp में घुसी इजरायली एजेंसी? कौन-कौन हुए इस जासूसी के शिकार?

whatsapp

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. मैसेंजर एप्लीकेशन व्हाट्सएप (WhatsApp) के द्वारा देश के कुछ पत्रकारों और हस्तियों की जासूसी की खबर ने भारतीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। व्हाट्सएप ने कई भारतीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बताया है कि, एक इजरायली सॉफ्टवेयर के जरिए लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी जासूसी की गई है।



जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों की जासूसी की गई है, उनके नाम पर गौर करने पर संदेह पैदा होता है कि क्या इसमें सरकार की कोई भूमिका रही है? इस बारे में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि, ‘भारत के नागरिकों की निजता में व्हाट्सएप पर उल्लंघन होने को लेकर सरकार चिंतित है। इस बारे में व्हाट्सएप से पूछा गया कि, वह लाखों भारतीयों की निजता की सुरक्षा को लेकर क्या कर रहे हैं?’

क्या है पूरा मामला

दरअसल, गुरुवार को व्हाट्सएप ने बताया कि, इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी एनएसओ ग्रुप (NSO Group) की ओर से भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को स्पाइवेयर द्वारा टारगेट कर उनकी जासूसी की गई। इजरायली कंपनी के द्वारा Pegasus नाम के स्पाईवेयर से भारतीय पत्रकारों को निशाना बनाया गया, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा पत्रकार, वकील और हस्तियां शामिल हैं। व्हाट्सएप ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया है कि भारतीय पत्रकार और ह्यूमन राइट ऐक्टिविस्ट्स इस जासूसी का टार्गेट थे। बता दें पीगासस का इस्तेमाल कोई आम शख्स नहीं कर सकता है और इसे NSO Group ने सरकारों के लिए बनाया गया है।

क्या है Spyware

यह एक सॉफ्टवेयर है जो आपके कंप्यूटर या मोबाइल का ‘जासूस’ है। इसका मकसद आपके पर्सनल और प्रोफेशनल मैसेज को चुराने का होता है| यह सॉफ्टवेयर यूजर को बिना बताए ही उनके कंप्यूटर या डिवाइस में इंस्टाल हो जाता है। Pegasus स्पाइवेर व्हाट्सएप के अलावा सेल डाटा, स्काइप, टेलिग्राम, वाइबर, एसएमएस, फोटो, ईमेल, कॉन्टैक्ट, लोकेशन, फाइल्स, हिस्ट्री ब्राउज़िंग और माइक-कैमरा तक को अपने कब्जे में ले सकता है।

निशाने पर आई मोदी सरकार

गुरुवार को जब यह मामला सामने आया तो मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई। जिसके बाद गृह मंत्रालय ने कहा है कि ये सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने व्हाट्सएप से 4 नवंबर तक इस मामले में सफाई देने को कहा है।

कौन हुए इस खेल के शिकार?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक भारत के 10 एक्टिविस्ट ने यह पुष्टि की है कि व्हाट्सएप ने उन्हें बताया कि उनकी जासूसी की गई है। इन लोगों में बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस में वकील निहाल सिंह राठौड़, जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं।

ये भी पढ़े…

13 लाख भारतीयों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड का डेटा चोरी, ऑनलाइन बेच रहे हैकर्स

यदि आप भी हुए हैं ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार, तो ऐसे कीजिए शिकायत

16 देशों में हैक हुआ कार्टून नेटवर्क, तीन दिन तक दिखाते रहे गंदे वीडियो

Related posts