JEE-NEET परीक्षा को लेकर क्यों हो रहा विवाद? सात राज्यों के मुख्यमंत्री SC का दरवाजा खटखटाने को तैयार

चैतन्य भारत न्यूज

देश में नीट-जेईई परीक्षा को लेकर विरोध हो रहा है। पहले जेईई की परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच और नीट की परीक्षा 26 जुलाई को शेड्यूल की गई थी। लेकिन कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के कारण परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी गई थी। अब जेईई मेन परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच और नीट की परीक्षा 13 सितंबर को तय की गई। इसके अलावा जेईई एडवांस की परीक्षा 27 सितंबर को तय की गई।

छात्रों की राय बंटी हुई

इन दोनों परीक्षाओं को लेकर छात्रों की राय बंटी हुई है। बिहार, असम जैसे बाढ़ प्रभावित राज्यों के छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होने की राह में मुश्किलें गिना रहे हैं। हालांकि, उन छात्रों की संख्या बहुत बड़ी है जो चाहते हैं अब जेईई और नीट की परीक्षाएं नहीं टलें क्योंकि वायरस के कारण इनमें पहले से ही विलंब हो चुका है। उनका कहना है कि अगर परीक्षाएं नहीं हुईं तो उनका एक वर्ष बेकार हो जाएगा। उनका कहना है कि परीक्षा को लेकर काफी तनाव होता है और परीक्षाएं स्थगित हुईं तो उनका तनाव लंबे समय तक बरकरार रहेगा जो उनके लिए उचित नहीं होगा।

उम्मीदवारों और अभ‍िभावकों का विरोध शुरू

परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों और उनके अभ‍िभावकों ने विरोध शुरू कर दिया। उम्मीदवारों ने कहा कि, जब देश में कोरोना के मामले कुछ हजार थे, उस समय सरकार ने परीक्षा स्थगित कर दी। अब जब मामले 30 लाख के पार हो चुके हैं तो परीक्षा करा रहे हैं। यही मुद्दा लेकर उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यहां उनकी याचिका पर कोर्ट ने एग्जाम स्थगित करने के लिए इंकार कर दिया।

NTA ने जारी किया बयान

दोनों ही परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का इसे लेकर बयान आया है कि, यदि इस साल परीक्षा स्थगित होती है तो यह अगले साल के शैक्षणिक कैलेंडर को प्रभावित करेगा। आख‍िरकार उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन खड़ा किया। ये आंदोलन देखते ही देखते बड़ा होने लगा। मीडिया में ये मुद्दा आने के बाद इससे राजनीतिक दल भी जुड़ने लगे।

छात्रों ने बताई अपनी परेशानी

सोशल मीडिया पर कुछ छात्र सरकार से अपनी मांगों पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि, सुबह 7 बजे जेईई परीक्षा केंद्र को रिपोर्ट करना होगा। मेरा केंद्र लगभग 150 किलोमीटर दूर है और वर्तमान में कोई ट्रेन या बस सेवा उपलब्ध नहीं है। हम कैसे पहुंचेगे। इस तरह कई छात्र बताने लगे कि उनके परीक्षा केंद्र 200 से 250 किलोमीटर दूर हैं। अब हम कैसे वहां पहुंच पाएंगे। कई घंटे मास्क पहनकर बैठने को भी छात्र असहज बता रहे थे।’

राजनीतिक दल विरोध में हुए शामिल

धीरे-धीरे इस मुद्दे से विपक्षी पार्टी के नेता भी जुड़ने लगे। वहीं कुछ सत्ताधारी पार्टी के समर्थक भी मोदी सरकार से छात्रों की मांगों को सुनने का आग्रह करते दिखे। सबसे पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला और कहा कि छात्रों के मन की बात सुने मोदी सरकार। फिर कई राजनीतिक दल जैसे ममता बनर्जी, ओवैसी और दिल्ली के श‍िक्षामंत्री ने भी इस पर खुलकर उम्मीदवारों का समर्थन किया।

सात राज्यों के मुख्यमंत्री SC जाने को तैयार

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी सरकार से कहा है वह छात्रों की बात पर गौर करे। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने परीक्षा को ‘अन्याय’ कहा। अब तक सात राज्यों के मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर चुके हैं। इसके अलावा छात्रों का भी आंदोलन जारी है। इन सभी के बीच एनटीए की ओर से अपनी प्रक्रिुया जारी है।

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