इस साल क्यों गिरा सेंसेक्स?

टीम चैतन्य भारत

शेयर बाजार को प्रभावित करने वाले बड़े कारण

नए साल 2019 की शुरुआत के बाद शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशक बहुत आशावादी नजरिए से काम कर रहे थे। लेकिन, इस उम्मीद पर पानी फिर गया और इस साल अब तक बाजार एक निश्चित सीमा में गिर गया। कारोबार विश्लेषक और फंड प्रबंधक घरेलू शेयर बाजार में तेज गिरावट के अलग-अलग, लेकिन सुखद कारण गिना रहे हैं। इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के खतरे से लेकर चीन के साथ ट्रेड वॉर तक शामिल हैं, जिसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई। हालांकि इसकी सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि ट्रेडरों को लगता है कि कुछ वर्षों से भारतीय इक्विटी बाजार बहुत महंगा हो गया है और शेयरों की वैल्यू तेजी से बढ़ी है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वॉल स्ट्रीट को लगता है कि अंदरुनी तौर अमेरिकी अर्थव्यवस्था असाधारण रूप से मजबूत है। फिर भी निवेशक यह अंदाजा लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि बाजार में जोखिम किस हद तक गंभीर है। उन्हें यह भी लगता है कि हरेक नई घटना को लेकर बाजार की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।

बहरहाल, शेयर बाजार पर प्रतिकूल असर डालने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा है। गौर करने वाली बात है कि 2019 में कच्चे तेल की कीमतें सबसे ऊंचे स्तर तक जा चुकी हैं। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक के सदस्य देशों की तरफ से आपूर्ति में कटौती इसकी सबसे बड़ी वजह रही। कच्चे तेल के इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट कू्रड और अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई के वायदा भाव ऊपर-नीचे तो हो रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर इनमें तेजी का रुझान बना हुआ है। शेयर और कमोडिटी बाजार पर इसका विपरीत असर हुआ।

इन सबके अलावा ब्याज दरों के मामले में अस्थिरता बढ़ना और इनमें बढ़ोतरी ने शेयर बाजार को गिराने में अग्रणी भूमिका निभाई है। नतीजतन फरवरी के दौरान अब तक बड़ी तादाद में ब्ल्यूचिप स्टॉक्स (बड़ी कंपनियों के शेयर) 52 हफ्तों के नए निचले स्तर पर आ गए। वेदांता लिमिटेड, टीवीएस मोटर्स और वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स ऐसे शेयरों में शामिल हैं। अच्छी बात यह रही कि फरवरी में शेयर बाजार ने थोड़ी वापसी भी की, खास तौर पर यह देखते हुए कि अमेरिकी बाजार में शानदार ग्रोथ आई, क्योंकि भारतीय बाजार का रुझान इन दिनों वैश्विक बाजारों के हालात पर ज्यादा निर्भर हैं।

दिलचस्प है कि इस महीने के मध्य में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में कुछ रिकवरी देखी गई, जिससे एक हद तक निफ्टी के शेयरों को रिकवर होने में मदद मिली। बावजूद इसके इस बात की तगड़ी आशंका है कि आगामी लोकसभा चुनाव तक शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि ज्यादातर लोगों को लगता है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए थोड़ा कम बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में वापसी करेगा, लेकिन यदि कांग्रेस या फिर बीजेपी के गठबंधन बहुमत हासिल करने में विफल रहते हैं तो बाजार में इसकी त्वरित प्रतिक्रिया देखी जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो विश्लेषकों को लगता है कि अमेरिकी शेयर बाजार में भारी करेक्शन (अत्यधिक तेजी के बाद स्वाभाविक गिरावट) आएगा। इस आशंका की वजह यह है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान अमेरिकी बाजार में कमोबेश तेजी रही है और अब रुझान पलटने के आसार हैं। कुल मिलाकर यदि अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता पर गौर करें तो लगता है कि इस साल वैश्विक शेयर बाजार में भारी-उतार चढ़ाव की स्थिति रहेगी। जाहिर है, मौजूदा परिदृश्य में यही सलाह होगी कि निवेश को लेकर कोई भी फैसला करने से पहले बाजार विशेषज्ञों और आला दर्जे के सलाहकारों से संपर्क कर लें।

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