बदल गई किलोग्राम की परिभाषा, देश में समय के इस्तेमाल के लिए भी कानून बनाएगी सरकार

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चैतन्य भारत न्यूज

20 मई से भारत में किलोग्राम की परिभाषा बदल गई है। न सिर्फ किलोग्राम बल्कि इसके साथ ही केल्विन, मोल और एम्पीयर की भी परिभाषा को बदल दिया गया है। अब से स्कूल में भी छात्रों को इसकी नई परिभाषा पढ़ाई जाएगी। नई परिभाषा के अनुरूप, नेशनल फिजिक्स लैब में 1 ग्राम का वेट तैयार करने के लिए किब्बल तराजू तैयार किया गया। लेकिन 1 किलो का बाट बनाने के लिए तराजू तैयार करने में करीब तीन साल तक का समय लग सकता है।

जानकारी के मुताबिक, वैज्ञानिक अब माप के तौर पर प्लांक कॉन्स्टैंट का प्रयोग करेंगे। यह क्वांटम मैकेनिक्स की एक वैल्यू है। यह ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेट्स का भार होता है। इसकी मात्रा 6.626069934*10-34 जूल सेकेण्ड है। जिसमें सिर्फ 0.0000013% की ही गड़बड़ी हो सकती है। इससे एम्पीयर, केल्विन और मोल जैसी ईकाईयों में भी बदलाव आ सकता है। हालांकि इससे आम जनता को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन उद्योग और विज्ञान के क्षेत्र में इसका प्रयोग होने की उम्मीद है क्योंकि वहां सटीक माप की जरूरत होती है।

इसके अलावा भी एक और बदलाव हुआ है और वो है देश में एक समय होना। नेशनल फिजिक्स लैब (एनपीएल) रेलवे समेत बैंकिंग सेक्टर से लेकर सभी सेक्टर तक एक ही समय उपलब्ध करवाएगा। एनपीएल के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने बताया कि, सरकार ने भारत में हर उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले समय को एनपीएल के समय के अनुसार करने की योजना बनाई है। बता दें एनपीएल का समय अंतर्राष्ट्रीय समय की तुलना में 2.7 नैनो सेकंड तक सटीक है। फिलहाल देशभर में ठीक समय आकाशवादी और दूरदर्शन के जरिए पहुंचाया जाता है।  सरकार की योजना पूरे देश में सिर्फ एक समय के इस्तेमाल की है। इसके अनिवार्य इस्तेमाल के लिए सरकार जल्द ही संसद में विधेयक लाएगी।  इसरो ने तो अपने प्रक्षेपणों में इसका इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।

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