आज है साल का सबसे छोटा दिन आज, अब पड़ेगी खूब , जानिए इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह

चैतन्य भारत न्यूज

21 दिसंबर 2020 साल का सबसे छोटा दिन और लंबी रात रहने वाली है। हर साल ये दिन बदलता रहता है। पिछले साल ये दिन 22 दिसंबर को था। साल के इस सबसे छोटे दिन को विंटर सॉल्सटिस कहते हैं। ये एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है सूरज का स्थिर हो जाना। जानिए, क्या है इसके पीछे का विज्ञान और इस दिन से पहले और बाद में क्या-क्या बदलता है।

इस दिन सूर्य कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर प्रवेश करता है। ये वो समय होता है जब सूर्य की किरणें बहुत कम समय के लिए पृथ्वी पर रहती हैं। सूर्य की मौजूदगी करीब 8 घंटे रहती और इसके अस्त होने के बाद लगभग 16 घंटे की रात रहती है। इसका मतलब ये है कि इस दिन धरती के इस हिस्से में सूरज सबसे कम देर के लिए रहेगा। वहीं दक्षिणी गोलार्ध में आज ही सूरज सबसे ज्यादा देर तक रहेगा और इस तरह से इस हिस्से में आने वाले देश आज के दिन सबसे बड़ा दिन देखेंगे। जैसे अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में आज से गर्मी की शुरुआत हो रही है।

आज का दिन दुनिया के दो हिस्सों में दो अलग-अलग तरीकों से दिख रहा है, सबसे छोटा और सबसे लंबा। दिन के छोटे या बड़े होने का कारण है धरती की पॉजिशन। हमारा ग्रह भी दूसरे सारे ग्रहों की तरह अपनी धुरी पर लगभग 23।5 डिग्री पर झुका हुआ है। इस तरह झुके होकर अपनी धुरी पर चक्कर लगाने के कारण होता ये है कि सूरज की किरणें किसी एक जगह ज्यादा और दूसरी जगह कम पड़ती हैं। जिस जगह सूरज की रोशनी कम देर के लिए आती है, वहां दिन छोटा, जबकि ज्यादा रोशनी से दिन बड़ा होता है।

बढ़ जाएगी ठंड- विंटर सॉल्सटिस के बाद ठंड काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस घटना के बाद पृथ्वी पर चंद्रमा की रोशनी ज्यादा देर तक रहने लगती है। जबकि सूर्य बहुत कम समय तक अपनी रोशनी पृथ्वी पर बिखेर पाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय टाइम जोन और भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

समर सोल्सटिस- विंटर सॉल्सटिस के विपरीत 20 से 23 जून के बीच समर सॉल्सटिस भी मनाया जाता है। यह साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। वहीं 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर होता है।

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