पारसी अग्नि मंदिर में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के प्रवेश की अनुमति न होने का मामला कोर्ट में

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट में संजीव कुमार नामक वकील ने जनहित याचिका दायर की थी जिसमें यह कहा गया था कि, पारसियों के अग्नि मंदिर में दूसरे धर्मों के लोगों को और मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं है। संजीव ने इस नियम को असंवैधानिक और गैर-कानूनी बताया। अब इस मामले में दिल्ली पारसी अंजुमन (डीपीए) ने कहा है कि, ‘याचिका गलत विचार पर आधारित है और पारसी धर्म के मूल सिद्धांतों, विश्वासों, ढांचों और कानूनी स्थिति से अनभिज्ञ है।’

दिल्ली पारसी अंजुमन ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि, ‘मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के अग्नि मंदिर में प्रवेश पर रोक की वजह पवित्र अग्नि का संरक्षण करना है।’ साथ ही संस्था ने यह भी कहा है कि, ‘ना सिर्फ पारसी धर्म बल्कि किसी भी धर्म की रजस्वला महिला के अग्नि मंदिर में प्रवेश करने के लिए कानूनी और संवैधानिक दोनों ही रूप से इजाजत नहीं है।’

संस्था की ओर से मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति ए.जे. भंभानी की पीठ को एक हलफनामा सौंपा गया था जिसमें कहा गया है कि, ‘किसी भी ऐसे पारसी पुरुष को भी अग्नि मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं होती जिसके शरीर में चोट लगी हो और रक्त बह रहा हो।’ संस्था ने कहा, ‘महिलाओं पर यह प्रतिबंध न तो सदा के लिए होता है और न ही मनमाने तरीके से। यह केवल मासिक धर्म की अवधि के लिए होता है। इसका मकसद पवित्र अग्नि की हिफाजत है और यह पारसी धर्म का अभिन्न हिस्सा है।’

साथ ही उन्होंने यह भी जवाब दिया कि, गर्भगृह में तयशुदा पुजारी का ही प्रवेश होता है और पारसी पुरुष भी मंदिर में एक निश्चित स्थान से आगे नहीं जा सकते।’ अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को करने का आदेश दिया है।

इससे पहले भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के धर्मस्थलों में प्रवेश न मिलने को लेकर विवाद हो चुके हैं। सबरीमला मंदिर, शनि शिंगणापुर, हाजी अली और निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में भी महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर विवाद हुआ था।

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