किताबों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दिखाया जाता है ‘दब्बू’, यूनेस्को ने उठाए सवाल

चैतन्य भारत न्यूज

यूनेस्को वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि स्कूली पुस्तकों में आधी आबादी को कम आंका जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां कहीं भी इनको यदि शामिल भी किया जाता है तो इन्हें सिर्फ पारंपरिक भूमिकाओं में दर्शाया गया है। ज्यादातर पुरुषों की तुलना में महिलाओं की छवि हल्की रखी जाती है और इन्हें दब्बू दिखाया जाता है।

यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक किताबों में लड़कियों के रोल कहीं न कहीं कमजोर हैं। इन्हें पढाई में जहां कहीं भी शामिल किया गया है, वहां की भूमिका को पारंपरिक दिखाया गया है। वार्षिक रिपोर्ट के चौथे संस्करण में कहा गया है कि किताबों में महिलाओं को ‘कम प्रतिष्ठित’ पेशों में दर्शाया गया है। इन कामों को करते हुए भी वो स्वभाव में अंतर्मुखी और दब्बू दिखाई जाती हैं। यूनेस्को ने इसका उदाहरण देते हुए कहा है कि जहां किताबों में पुरुषों को डॉक्टर दिखाया जाता है, वहीं महिलाएं नर्स की भूमिका में प्रदर्शित की जाती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के रोल केवल फूड, फैशन या एंटरटेनमेंट से संबंधित विषयों में दिखाए जाते हैं। महिलाओं को स्वैच्छिक भूमिकाओं में और पुरुषों को वेतन वाली नौकरियों में दिखाया जाता है। UNESCO रिपोर्ट के अनुसार कुछ देश किताबों से लड़कियों की इस पुरानी इमेज में संतुलन लाने के प्रयास कर रहे हैं।

यूनेस्को रिपोर्ट के मुताबिक, फारसी व विदेशी भाषा की 60, विज्ञान की 63 और सामाजिक विज्ञान की 74 फीसदी किताबों में महिलाओं की कोई तस्वीर नहीं है। रिपोर्ट में महाराष्ट्र के Maharashtra State Bureau of Textbook Production and Curriculum Research द्वारा 2019 में लैंगिक रूढ़िवादों को हटाने के लिए कई पाठ्यपुस्तक छवियों में सुधार का भी संज्ञान लिया गया।

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