Women Equality Day : भारत में आज भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और आजादी नहीं…

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चैतन्य भारत न्यूज

समाज में महिलाओं को समान दर्जा दिलाने के लिए और उनके अधिकारों को संरक्षित करने के लिए हर साल 26 अगस्त को ‘वूमेन इक्विलिटी डे’ यानी ‘महिला समानता दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत साल 1973 में हुई थी। संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में 26 अगस्त को 19वें संविधान संशोधन के जरिए महिलाओं को समानता का अधिकार दिया गया। इसके तहत महिलाओं को भी पुरुषों की तरह वोट देने का आधिकार मिला था। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार मिलना है। लेकिन भारत में आज भी कई जगहें ऐसी हैं जहां महिलाओं को पुरुषों जैसे अधिकार नहीं मिलते।

  • पुरुषों की तरह ही महिलाओं को भी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार होना चाहिए। लेकिन हमारे देश में आज भी कुछ रूढ़िवादी परिवारों में महिलाओं को इसकी स्वतंत्रता नहीं मिली है। कई परिवारों में लड़कियां खुलकर अपनी पसंद जाहिर नहीं कर पाती हैं।
  • लड़कियां क्या पहने और क्या नहीं, इसका फैसला वो खुद नहीं बल्कि समाज के ठेकेदार करते हैं। भारत में कई जगहें ऐसी भी हैं जहां जीन्स-टॉप या टी-शर्ट पहनने वाली लड़कियों या महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता है।
  • माता-पिता के लिए लड़का और लड़की दोनों ही समान होते हैं। लेकिन फिर भी उनके देहांत के बाद प्रॉपर्टी का पूरा अधिकार सिर्फ बेटों का ही होता है। प्रॉपर्टी में बेटियों की हिस्सेदारी के लिए कानून भी बनाया गया है लेकिन फिर भी कई परिवार इस पर अमल नहीं करते हैं।
  • मूड फ्रेश करने के लिए या तनाव दूर करने के लिए अक्सर लड़के अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने या सोलो ट्रैवलिंग पर जाते हैं, लेकिन जब बात लड़कियों की आती हैं तो आज भी कई परिवारों को लड़कियों का घर से बाहर घूमना पसंद नहीं आता है। ऐसे में लड़कियों को अपने सभी अरमान दबाकर चारदीवारी में ही कैद रहना पड़ता है।
  • आज भी कई महिलाएं ऐसी हैं जो हर दिन अपने घर और समाज में असमानता और भेदभाव का शिकार हो रही हैं।
  • कई परिवारों में बचपन में लड़का-लड़की में फर्क किया जाता है। जहां लड़कों की परवरिश में कोई कमी नहीं रखी जाती वहीं लड़कियों की छोटी-छोटी जरूरतों को भी नज़रअंदाज किया जाता है।

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