इन 5 मुस्लिम महिलाओं ने ‘तीन तलाक’ को खत्‍म करवाने के लिए लड़ी जंग, कभी इन्हें भी मिला था फोन या खत पर तलाक

triple talaq,afreen rahman,Shayara Bano

चैतन्य भारत न्यूज

मंगलवार को तीन तलाक पर रोक लगाने से संबंधित बिल राज्यसभा में पास हो गया है। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उसके बाद तीन तलाक खत्म हो जाएगा। इस खुशी के मौके पर देशभर में मुस्लिम महिलाओं ने जश्न मनाया। इस बिल को अंजाम तक पहुंचाने में कई महिलाओं का संघर्ष शामिल है। हम आपको उन महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई और इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गईं।

सायरा बानो

इनमें सबसे अहम नाम है उत्तराखंड की सायरा बानो का जो सबसे पहले इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गईं थीं। 36 साल की सायरा को शादी के 15 साल बाद 2015 में उनके पति ने खत पर तीन बार तलाक लिखकर तलाक दे दिया था। फिर उन्होंने कोर्ट का रुख किया। सायरा के पति ने उन्हें छह बार गर्भपात के लिए भी मजबूर किया था। सायरा ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी।

अतिया साबरी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली अतिया साबरी की शादी 2012 में हुई थी। उनके पति ने साल 2016 में कागज पर तीन तलाक लिखकर अतिया से रिश्ता तोड़ लिया था। पति ने तब तलाक दिया जब उनकी दो बेटियां तीन और चार साल की थी। अतिया ने आरोप लगाया कि दो बेटियां होने से नाराज उनके पति और ससुर उन्हें घर से निकालना चाहते थे। उन्हें दहेज के लिए भी परेशान किया जाता था। अतिया का कहना था कि मुझे जिस तरह से तलाक दिया गया, उसे कतई सही नहीं कहा जा सकता था, इसलिए मैंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

गुलशन परवीन

उत्तर प्रदेश के रामपुर की रहने वाली गुलशन परवीन को उनके पति ने साल 2015 में 10 रुपए के स्टांप पेपर पर तलाकनामा दिया था। गुलशन की साल 2013 में शादी हुई थी और उनका दो साल का बेटा रिदान भी है। तलाक के बाद गुलशन ने पति के नोटिस को स्वीकार करने से मना किया था और फैमिली कोर्ट का रुख किया था। गुलशन ने यह भी आरोप लगाया था कि उनका पति दहेज के लिए उनके साथ मारपीट भी करता था।

आफरीन रहमान

जयपुर की रहने वाली 25 वर्षीय आफरीन रहमान की शादी 2014 में मेट्रीमोनियल साइट के जरिए हुई थी। शादी के दो-तीन महीने बाद ही ससुराल वाले उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे और उनके साथ मारपीट भी करने लगे। 2015 में उन्हें घर छोड़कर चले जाने को कहा जिसके बाद आफरीन अपने मायके आ गईं। कुछ ही दिन बाद इंदौर में रहने वाले उनके पति ने स्पीडपोस्ट के जरिए तलाक दे दिया। फिर आफरीन ने कोर्ट से न्याय की मांग की।

इशरत जहां

हावड़ा, पश्चिम बंगाल की रहने वाली इशरत जहां को उनके पति ने शाद के 15 साल बाद दुबई से फोन पर तीन तलाक दिया था। बस तीन बार तलाक कहकर पति ने फोन काट दिया था। इसके बाद पति मुर्तजा ने दूसरी महिला से शादी कर ली। इतना ही नहीं बल्कि पति इशरत के चार बच्चों को भी अपने साथ ले गया था। फिर इशरत ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने बच्चों को वापस दिलाने, साथ ही उन्हें पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की। इसके अलावा इशरत ने पति से गुजारा भत्ता भी मांगा। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं।

ये भी पढ़े… 

महिलाओं को बोर्ड में शामिल करने वाली कंपनियां 5 साल में 10% बढ़ीं, शेयर होल्डिंग भी हुई बेहतर

600 रुपए महीना वृद्धावस्था पेंशन पाने वाली महिला ने बकाया पता चलते ही चुकाया 480 रुपए टैक्स

इन 7 राज्यों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का एक भी केस नहीं, 50% से ज्यादा महिलाएं हैं नौकरीपेशा

Related posts