उतार-चढ़ाव के दौर में काम के शेयर

टीम चैतन्य भारत।

इन दिनों कुछ तगड़ी संभावनाओं वाली कंपनियों के शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर हैं। दूसरी तरफ आम चुनाव के बाद शेयर बाजार का रुझान पलटने की गुंजाइश भी है। जाहिर है, ऐसे शेयरों पर दांव लगाया जा सकता है।

पिछले 11 महीनों के समग्र प्रदर्शन पर गौर करने से पता चलता है कि मिडकैप (मझोली कंपनियों के शेयरों का इंडेक्स) और स्मॉलकैप (छोटी कंपनियों के शेयरों का इंडेक्स) में भारी गिरावट आई है। इनमें से कुछ शेयरों की वैल्यू तो पिछले एक साल में 40-50 प्रतिशत तक कम हो गई है।

निफ्टी-100 मिडकैप इंडेक्स, जो एक चरण में 25 गुना कमाई के हिसाब से ट्रेड कर रहा था, फिलहाल 15 गुना के स्तर पर आ गया है। पिछले करीब एक महीने के दौरान इस इंडेक्स में 10 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यह स्थिति वैसे लोगों के लिए शानदार मौका मुहैया करा रही है, जो इस कैटेगरी के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। इसके उलट ब्रॉडर मार्केट में ज्यादा गिरावट आई है और अधिकतर शेयर अपने-अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं।

आम चुनाव का असर इस साल के आम चुनाव से पहले घरेलू शेयर बाजार में जोखिम बढ़ता जा रहा है। चुनाव के वक्त संभव है कि स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में गिरावट आए। लेकिन, जब सरकार की अच्छी संभावनाओं के साथ हालात बदल जाएंगे तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी शानदार रिटर्न देने की स्थिति में आ जाएंगे।

मौके दे रहा है बाजार कुल मिलाकर मौजूदा स्तर पर मिडकैप सेगमेंट की कुछ शानदार कंपनियों के शेयर खरीदारी के लिहाज से खासे आकर्षक हैं। इनमें बैंकिंग सेक्टर के शेयर शामिल हैं। जिन शेयरों की वैल्यू फिलहाल 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब हैं, उन पर दांव लगाया जा सकता है, क्योंकि इनके जरिए मोटा मुनाफा की तगड़ी गंुजाइश नजर आ रही है।

उदाहरण के लिए आवंति फीड्स, फेडरल बैंक और ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड के शेयर निवेशकों को जोरदार मुनाफा दिला सकते हैं। वजह यह है कि इन कंपनियों/बैंकों का प्रबंधन बहुत अच्छा है। हालांकि प्राइसिंग के मामले में आवंति फीड्स के शेयर इन दिनों दबाव में हैं और इनका सामान्य रुझान गिरावट की तरफ है, लेकिन यह कुछ समय की बात हो सकती है। आगे चलकर इसमें तेजी की तगड़ी संभावना है। चूंकि इनमें से ज्यादातर शेयरों में ऊंचे स्तर से गिरावट आई है और इसलिए इनमें आगे और गिरावट का जोखिम सीमित है।

वैसे निवेशकों को यह बात ध्यान में रखनी होगी आम चुनाव का जोखिम अब भी एक हद तक बना हुआ है, खास तौर पर यह जोखिम तब बढ़ सकता है जब नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप न आएं। फिर भी इस बात की संभावना ज्यादा है कि यह जोखिम बीते दिनों की बात हो जाएगी और बाजार का रुझान हमेशा की तरह मजबूती की तरफ पलटेगा।

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