विश्व एड्स दिवस : आखिर क्यों मनाया जाता है विश्व एड्स दिवस, भारत में है 1.25 लाख एड्स के मरीज

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चैतन्य भारत न्यूज

दुनियाभर में एचआईवी (HIV) संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को ‘विश्व एड्स दिवस’ (World AIDS Day) मनाया जाता है। यह दिन पूरी दुनिया को इस बीमारी के खिलाफ एक जुट होकर लड़ने का मौका देता है। सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरूआत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) में एड्स की जागरुकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर ने अगस्त 1987 में की थी। विश्व एड्स दिवस इस जानलेवा रोग के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर देता है और एचआईवी तथा एड्स की रोकथाम, उपचार और देखभाल को बढ़ावा देता है।


विश्व एड्स दिवस

विश्व एड्स दिवस मनाने का मकसद एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में जागरूकता फैलाना है। एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 36.9 मिलियन लोग एचआईवी के शिकार हो चुके हैं। दुनियाभर में एड्स के कारण अब तक ढाई करोड़ लोग मर चुके हैं। अफ्रीका में सबसे ज्यादा एड्स रोगी पाए जाते हैं, जबकि इस मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अभी करीब 1.25 लाख एड्स के मरीज हैं और प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में पहला एड्स मरीज 1986 में मद्रास में पाया गया।

क्या है एचआईवी एड्स

एचआईवी वायरस के कारण एड्स की बीमारी हो सकती है। एड्स तब होता है जब व्यक्ति का इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने में कमजोर पड़ जाता है। जिसके चलते शरीर खुद की रक्षा नहीं कर पाता है और शरीर में कई तरह की बीमारियां, संक्रमण हो जाते हैं। बता दें एचआईवी, (ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस) एक वायरस है। एचआईवी वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली की टी सेल्स पर हमला करता है। जबकि एड्स एक मेडिकल सिंड्रोम है, जो एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रुप में प्रकट होती है। ध्यान रहे एचआईवी एक इंसान से दूसरे इंसान को हो सकता है लेकिन एड्स नहीं हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित है तो यह जरूरी नहीं कि उसे एड्स हुआ हो।

AIDS का मतलब

A यानी एक्वायर्ड यानी यह रोग किसी दूसरे व्यक्ति से लगता है। ID यानी इम्यूनो डिफिशिएंसी यानी यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त कर देता है। S यानी सिंड्रोम यानी यह बीमारी कई तरह के लक्षणों से पहचानी जाती है।

विश्व एड्स दिवस 2019 की थीम

हर वर्ष विश्व एड्स दिवस की कोई न कोई थीम निर्धारित की जाती है। इस साल की थीम है ‘कम्युनिटीज मेक द डिफरेंस’।

एचआईवी के लक्षण?

  • बुखार
  • पसीना आना
  • ठंड लगना
  • थकान
  • भूख कम लगना
  • वजन घटा
  • उल्टी आना
  • गले में खराश रहना
  • दस्त होना
  • खांसी होना
  • सांस लेने में समस्या
  • शरीर पर चकत्ते होना
  • स्किन प्रॉब्लेम

इन वजहों से होता है एड्स

  • असुरक्षित यौन संबंध के जरिए एड्स के वायरस एड्स ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में तुरंत प्रवेश कर जाते हैं।
  • बिना जांच किए खून मरीज को देना भी एड्स फैलाने का माध्य होता है। बाहरी खून से इसके वायरस सीधे खून में पहुंच जाते हैं और बीमारी जल्दी घेर लेती है।
  • यदि मां एड्स से संक्रमित है, तो होने वाला शिशु भी संक्रमित ही पैदा होता है। जानकारी के मुताबिक, ट्रांसप्लांटेशन संक्रमण से भी एड्स लगभग 60 प्रतिशत तक फैलता है। बाकी बचा 40 प्रतिशत स्तनपान से शिशु में पहुंच जाता है।
  • एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार इस्तेमाल करने से भी यह बीमारी फैलती है।
  • संक्रमिक ब्लेड यूज करने से इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ सकता है।
(विशेष ध्यानार्थः यह आलेख केवल पाठकों की अति सामान्य जागरुकता के लिए है। चैतन्य भारत न्यूज का सुझाव है कि इस आलेख को केवल जानकारी के दृष्टिकोण से लें। इनके आधार पर किसी बीमारी के बारे में धारणा न बनाएं या उसके इलाज का प्रयास न करें। यह भी याद रखें कि स्वास्थ्य से संबंधित उचित सलाह, सुझाव और इलाज प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकते हैं।)

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