World Asthma Day: हर उम्र के लोगों को अपना शिकार बनता है अस्थमा, जानें इसका कारण, लक्षण, बचाव और घरेलू नुस्खे

world asthama day

चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार विश्व अस्थमा दिवस (World asthma day) मनाया जाता है। इस बार अस्थमा दिवस 04 मई को है। विश्व अस्थमा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के लोगों को अस्थमा बीमारी के बारे में जागरूक करना है। भारत में एक अनुमान के मुताबिक अस्थमा के रोगियों की संख्या लगभग 15 से 20 करोड़ है जिसमें लगभग 12 प्रतिशत भारतीय शिशु अस्थमा से पीड़ित हैं।

विश्व अस्थमा दिवस का इतिहास

विश्व अस्थमा दिवस मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्व में घोषित किया गया है। विश्व अस्थमा दिवस साल 1998 में पहली बार बार्सिलोना, स्पेन सहित 35 देशों में मनाया गया। विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन प्रत्येक वर्ष ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा किया जाता है।

क्या है अस्थमा

अस्थमा (दमा) श्वसन सम्बन्धी रोग है, यह सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है। इस रोग में पीड़ित को सांस लेने में तकलीफ, खांसी तथा छाती में दबाव आदि हो सकता है। यह श्वसन मार्ग में सूजन के कारण होता है। अस्थमा अनुवांशिक भी हो सकता है और पर्यावरण के कारण भी। पर्यावरण में प्रदूषण तथा एलर्जेटिक कणों के कारण भी यह हो सकता है।

अस्थमा के लक्षण

अस्थमा एक गंभीर बीमारी है और इसको जड़ से खत्म कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में अस्थमा होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। अस्थमा के लक्षणों को पहचानना भी बहुत जरूरी होता है। इसके तीन मुख्य लक्षण हैं-

  1. फेफड़ों में ज्यादा मात्रा में कफ।
  2. श्वास नली और उसके आसपास की मांसपेशियों का संकरा होना।
  3. श्वास नली में सूजन।

बचाव

  • अस्थमा के मरीज धूल-मिट्टी से दूर रहें।
  • ऐसे मरीजों को अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए पालतू जानवरों से थोड़ी दूरी बनाने की जरूरत है। अपने पालतू को हर हफ्ते नहलाएं।
  • वाकिंग, लो इम्पेक्ट एरोबिक्स और पानी से जुड़े व्यायाम करें।
  • आप साफ-सफाई का काम न करें। इससे उड़ने वाली धूल आपको सांस लेने में दिक्कत कर सकता है या अस्थमा के अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
  • धूम्रपान बिलकुल न करें। यदि आपके घर में भी कोई धूम्रपान करता है, तो उसे भी इससे दूर रहने के लिए कहें।
  • कोशिश करें कि आप पुराने धूल-मिट्टी के कपड़ों से दूर रहें।
  • अस्थमा रोगियों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी माना जाता है। इसलिए नियमित व्यायाम करें। लेकिन उससे पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
  • जब भी आप व्यायाम करें अपनी दवा और इनहेलर को पास में रखें। ताकि जरूरत पड़ने पर आप इन्हें इस्तेमाल कर सकें। डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही योग या एक्सरसाइज करना शुरू करें।

अस्थमा का इलाज

अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके विभिन्न तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है। अस्थमा ट्रिगर करने वाले कारकों (प्रदूषण कण इत्याद) से दूर रहने के कारण इससे बचा जा सकता है। कुछ ऐसे घरेलू उपाय भी है जिनसे आप अस्थमा को नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन इन्हें अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

लहसुन: अगर आप दूध में लहसुन की कुछ कलियां उबालें और रोज दूध के साथ इन्हें खाएं तो अस्थमा नियंत्रण में मदद मिलती है। आप चाहें तो चाय में लहसुन मिलाकर भी पी सकते हैं।

अदरक: अस्थमा के दौरान गर्म-गर्म चाय भी लाभकारी मानी जाती है।
अजवायन: गर्म पानी करें और इसमें अजवायन डाल कर उबालें। अब इसकी भाप लें। माना जाता है कि इससे अस्थमा रोगियों को फायदा होता है।

लौंग: लौंग को उबाल लें और गर्म पानी में शहद मिलाकर काढ़ा बनाकर पीएं।
पान व अशोक के बीज: पान के पत्तों के साथ अशोक के बीजों के चूर्ण की एक चम्मच मात्रा चबाने से सांस फूलने की शिकायत और दमा में आराम मिलता है।

मेथी की पत्तियां: मेथी की पत्तियों का ताजा रस, अदरक और शहद को धीमी आंच पर कुछ देर गर्म करके रोगी को पिलाने से अस्थमा रोग में काफी आराम मिलता है।

गेंदा का फूल व उसके बीज: यदि गेंदा के फ़ूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन तीन दिन तक किया जाए तो जिन्हें दमा और खांसी की शिकायत है, उन्हें काफी फायदा होता है।

तुलसी: गर्म पानी में तुलसी के 5 से 10 पत्ते मिलाएं और सेवन करें, यह सांस लेना आसान करता है। इसी प्रकार तुलसी का रस, अदरक रस और शहद का समान मिश्रण प्रतिदिन एक चम्मच के हिसाब से लेना अस्थमा पीड़ित लोगों के लिए अच्छा होता है।

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