World Book Day: इंटरनेट ने कम कर दी लोगों में पढ़ने की प्रवृत्ति, लेकिन नामुमकिन है किताबों का अस्तित्व मिटना

pustak diwas

चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day 2021) मनाया जा रहा है। किताबों को पढ़ने वाले और चाहने वालों के लिए आज खास दिन है। इस दिन दुनियाभर में किताबों को लेकर जागरुकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसे विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस भी कहा जाता है। चूंकि किताबी दुनिया में कॉपीराइट एक अहम मुद्दा है, इसलिए विश्व पुस्तक दिवस पर इस पर भी जोर दिया जाता है। इस कारण पुस्तक दिवस और कॉपीराइट दिवस एक साथ मनाया जाता है।

william shakespeare

23 अप्रैल को क्यों मना जाता है यह दिन?

23 अप्रैल 1564 को एक ऐसे लेखक ने दुनिया को अलविदा कहा था, जिनकी कृतियों का विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ। यह लेखक थे विलियम शेक्सपीयर। शेक्सपीयर ने अपने जीवन में करीब 35 नाटक और 200 से अधिक कविताएं लिखीं। उन्हें साहित्य-जगत में स्थान को देखकर यूनेस्को ने साल 1995 से और भारत सरकार ने 2001 से इस दिन को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।

कैसे मनाया जाता है पुस्तक दिवस?

दुनिया के अलग-अलग देशों में इस दिन को अपने हिसाब से मनाया जाता है। कहीं मुफ्त में किताबें बांटी जाती हैं तो कहीं प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। स्पेन में तो पुस्तक दिवस के पहले दो दिनों तक रीडिंग मैराथन का आयोजन होता है। इसके अंत में एक लेखक को प्रतिष्ठित मिगेल डे सरवांटिस पुरस्कार दिया जाता है। कई देशों में इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। हालांकि इस बार कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते विश्वभर में कहीं भी आयोजन नहीं किए जाएंगे।

बढ़ता जा रहा इंटरनेट प्रेम

पढ़ना किसे अच्छा नहीं लगता। बचपन में स्कूल से आरंभ हुई पढ़ाई जीवन के अंत तक चलती है। लेकिन दुर्भाग्यवश इन दिनों लोगों में पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है। अब लोग पुस्तकों से दूर भागकर इंटरनेट की तरफ जा रहे हैं। आज सब लोग सभी कुछ नेट पर ही खंगालना चाहते हैं। इसके चलते लोगों की जिज्ञासु प्रवृत्ति और याद करने की क्षमता भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। बच्चों के लिए तो यह विशेष समस्या है। पुस्तकें न सिर्फ ज्ञान देती हैं, बल्कि कला, संस्कृति, लोकजीवन, सभ्यता के बारे में भी बताती हैं। इंटरनेट पर पढ़ने से आंखों और मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में लोगों में पुस्तकों के प्रति आकर्षण पैदा करना जरुरी हो गया है। इन दिनों लॉकडाउन में आप भी घर में रहकर मोबाइल या टीवी की जगह पुस्तकों से दोस्ती कर उनके साथ ज्यादा समय बिताएं।

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