Breastfeeding Week : बच्चे को स्तनपान करवाने का बौद्धिक और आर्थिक महत्व भी

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चैतन्य भारत न्यूज

बच्चे के जीवन को स्वस्थ और बेहतर बनाने के लिए स्तनपान बेहद जरुरी है। यह बच्चे को सभी प्रकार के कुपोषण से बचाता है और साथ ही संकट के समय में बच्चों के लिए खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है। हर साल 1-7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस खास मौके पर चैतन्य भारत न्यूज की विशेष प्रस्तुति…

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स्तनपान बौद्धिक क्षमता से जुड़ा है। स्तनपान करने वाले बच्चों की बौद्धिक क्षमता 3 से 4 गुना तक बढ़ जाती है। इसके जरिए मां अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने बच्चे को देती है, जिससे बच्चे के रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में मदद मिलती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को स्तनपान कराने से डायरिया की संख्या में आधी तथा संक्रमण में एक तिहाई तक कमी लाई जा सकती है।

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इसका आर्थिक महत्व भी है

प्रारंभिक अवस्था में स्तनपान के दौरान मां द्वारा बच्चे को दुलारना और उसे लाड़-प्यार करना बच्चे के संज्ञानात्मक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जब भी मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रहीं हों और जब अपने बच्चे के साथ हों तो हमेशा बच्चे की ओर देखकर मुस्कुराएं, उनसे बात करें और उनके साथ खेलिए भी। बता दें स्तनपान स्वस्थ बच्चे और संपन्न राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे अच्छा निवेश है। स्तनपान में निवेश किया गया एक डॉलर अनुमानत: 35 डॉलर की आर्थिक वापसी दिलाता है। जन्म से छह महीने बाद तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाने की दर को और भी बेहतर बनाकर इसे कम से कम 50 प्रतिशत करने से आगामी दस सालों में 5,20,000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है। स्तनपान की बेहतर दर, कम और मध्य आय वाले देशों में, बच्चों के जीवित रहने की संभावना तथा संज्ञानात्मक क्षमता की वृद्धि के साथ ही उनके वयस्क होने पर आय क्षमता को भी बढ़ाती है। ऐसे सभी देश अगले 10 सालों में आर्थिक विकास में 300 अमेरिकी डॉलर तक की वृद्धि भी कर सकते हैं।

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स्तनपान प्रोत्साहन के लिए बने ‘ममता कार्नर’

हमारे देश में महिलाओं द्वारा खुले में स्तनपान कराएं जाने पर कई बार विवाद भी हो चुके हैं। ऐसे में सवाल यह था कि महिलाओं के घर से बाहर निकलने के बाद वह अपने बच्चे को कहां स्तनपान कराएं? सरकार ने माताओं को लज्जा और संकोच से बचाने व शिशुओं को मां का दूध मिले, इस उद्देश्य से ममता कार्नर बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर ममता काॅर्नर बनाए गए हैं जहां महिलाएं आसानी से अपने बच्चें को स्तनपान करवा सकती हैं।

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