विश्व बाल श्रम निषेध दिवस : बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाना है, उनसे मजदूरी नहीं करवाना है

चैतन्य भारत न्यूज

हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम पर रोक लगाना है और इस बारे में जागरुकता फैलाना है। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया का भविष्य बच्चे ही हैं। इसलिए इनके भविष्य को उज्जवल बनाना बेहद जरुरी है।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का इतिहास

5 से 17 आयु वर्ग के कई बच्चे ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें सामान्य बचपन से वंचित करते हैं, जैसे कि पर्याप्त शिक्षा, उचित स्वास्थ्य देखभाल, अवकाश का समय या बस बुनियादी स्वतंत्रता। 2002 में, संयुक्त राष्ट्र की संस्था जो काम की दुनिया को नियंत्रित करती है, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने इसी वजह से वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर लॉन्च किया। 2015 में विश्व नेताओं द्वारा अपनाए गए कई विकास लक्ष्यों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए नए सिरे से वैश्विक प्रतिबद्धता शामिल की गई थी। इसमें विशेष रूप से, वैश्विक समुदाय से सतत विकास लक्ष्यों का 8।7 लक्ष्य पूरा करने की ठानी जैसे, ‘मजबूर श्रम को खत्म करने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करना, मानव तस्करी को समाप्त करना और बाल श्रम के सबसे बुरे रूपों के उन्मूलन को सुरक्षित करना।’

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का महत्व

12 जून को बाल श्रम की समस्या के खिलाफ विश्व दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है और बाल श्रम की समस्या पर ध्यान दिया गया है ताकि इसे मिटाने या इसके खिलाफ लड़ने के तरीके खोजे जा सकें। बच्चों को जबरन श्रम में धकेल दिया जाता है, मादक पदार्थों की तस्करी और वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियों के लिए बच्चों को मजबूर किया जाता है। इस वजह से लोगों को बाल श्रम की समस्या के बारे में जागरूक करने और उनकी मदद करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2020 की थीम

हर वर्ष इस दिवस की एक थीम तय की जाती है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2020 की थीम ‘बच्चों को कोविड-19 महामारी’ (Protect Children in COVID-19 Times) के दौरान बचाना है।

Related posts