अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस : युवा पीढ़ी में तेजी से घटती जा रही सहनशीलता, खुद में सुधार से करें शुरुआत

international day of tolerance

चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 16 नवंबर को दुनियाभर में ‘अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस’ मनाया जाता है। बदलती जीवनशैली के चलते लोगों में सहनशीलता भी घटती जा रही है। ऐसे में सामाजिक माहौल ना बिगड़े और लोग एक दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहे, इसी को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाया जाता है।


कैसे हुई शुरुआत

साल 1995 में महात्मा गांधी की जयंती पर संयुक्त राष्ट्र ने सहनशीलता वर्ष मनाया था। इसी को आगे बढ़ाते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1996 में औपचारिक तौर पर प्रस्ताव पास कर अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस की शुरुआत की थी। प्रस्ताव में हर वर्ष 16 नवंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाए जाने की बात लिखी थी। उसके बाद से ही हर वर्ष इस दिन अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाया जाने लगा।

युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या

छोटी-छोटी मामूली-सी बातों पर झगड़ा होना अब आम बात हो गई है। लोग सभी रिश्ते-नाते भूलकर लड़ाई करने और कई बार तो जान लेने और देने पर उतारू हो रहे हैं। खासकर अगर युवा पीढ़ी की बात की जाए तो उनमें जल्द ही उत्तेजित हो जाने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार परिवार के सदस्य ‘गर्म खून’ और ‘लड़कपन’ कहकर बच्चों की बातों को टाल देते हैं। लेकिन यही गलती आगे जाकर गुस्से में बदल जाती है। आपा खो देने वाले लोग दूसरों के साथ-साथ खुद को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बिगड़ता खानपान और अनियमित दिनचर्या इसका बड़ा कारण

शास्त्रों में भी कहा गया है कि चिंता ‘चिता’ समान और क्रोध ‘विनाश’ की पहली सीढ़ी होता है। ऐसे में हर छोटी-छोटी बातों में क्रोध करने वाले अपने बने-बनाए काम तो बिगाड़ ही लेते हैं और साथ ही ऐसे लोग खुद की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि, आजकल बिगड़ते खानपान और अनियमित दिनचर्या से लोगों में तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में उनके अंदर सहनशीलता घट रही है और इसी वजह से वे ब्लड प्रेशर, हृदयरोग और डायबटीज जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। बढ़ते मरीजों की संख्या और घटनाएं इसके प्रमाण हैं। अधिकांश घटनाओं के लिए नशा भी जिम्मेदार है।

क्या है गुस्से की वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि, कई बार सही शिक्षा का अभाव भी नई पीढ़ी में मानसिक सहनशीलता कम हो रही है। साथ ही इसमें समाज और परिवार भी जिम्मेदार है। माता-पिता बच्चों की हर छोटी से छोटी जिद पूरी कर उनकी आदतों को खराब कर देते हैं। ऐसे में वह बढ़े होने के बाद जब उनकी जिदें पूरी नहीं होती तो वह क्रोधित होने लगते हैं। कई बार माता-पिता का अत्यधिक प्यार और आजादी भी बच्चों को अंधकार की ओर धकेल देती है।

कैसे हो समस्या का निदान

इस समस्या से बचने के लिए न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ और मजबूत रखना जरुरी है। माता-पिता को खुद के साथ-साथ बच्चों को भी सहनशील बनाना चाहिए। इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है खुद का मानसिक तनाव कम करना, तब जाकर आप बच्चों को इससे दूर रख सकेंगे। उनसे प्यार से बात करें और उन्हें अच्छे-बुरे की सीख दें।

ये भी पढ़े…

अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस : भारत की 21.9% आबादी गरीबी रेखा के नीचे! ये हो सकते हैं कारण

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : ये हैं दुनिया की 5 सबसे आम व गंभीर मानसिक बीमारियां, जिसके कारण जा रही लाखों लोगों की जान

विश्व शांति दिवस : दुनियाभर में शांति कायम रखने की एक पहल, बेहद खास है इस साल की थीम

 

Related posts