पृथ्वी दिवस 2020: हजारों साल पहले से आदिवासी समाज द्वारा मनाया जा रहा ‘पृथ्वी दिवस’

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चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 22 अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत 1970 से हुई थी। भले ही दुनिया 50 साल पहले से पृथ्वी दिवस मना रही हो लेकिन भारतीय आदिवासी समाज सैकड़ों सालों से पृथ्वी को पूजने की परंपरा निभा रहा है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी समूह द्वारा हर वर्ष पृथ्वी दिवस को ‘खद्दी परब’ के धार्मिक अनुष्ठान के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।

लॉकडाउन के कारण सामूहिक उत्सव नहीं

आदिवासी समाज द्वारा चैत्र पूर्णिमा पर खद्दी परब मनाया जाता है। इस दिन आदिवासी समाज धरती मां की पूजा धूमधाम से करता है। हालांकि, इस बार लॉकडाउन के कारण आदिवासी समाज ने अपने घरों में ही धार्मिक अनुष्ठान किया। इस बार कोई सामूहिक उत्सव नहीं मनाया गया।

प्रकृृति बचाने का संदेश देता है ‘खद्दी परब’

आदिवासी उरांव समाज के वरिष्ठ सदस्य एसआर प्रधान ने बताया कि, ‘प्रकृृति के महत्व को आदिवासी समाज ने हजारों साल पहले ही समझ लिया था। इस वजह से आदिवासी समाज के लोग ‘खद्दी परब’ पर पारंपरिक रीतिरिवाज के अनुरूप धरती माता, साल वृृक्ष, फूल की पूजा-अर्चना करके प्रकृृति को बचाने का संकल्प लेते हैं। लॉकडाउन और कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण इस बार खद्दी परब सामूहिक रूप से नहीं मनाया गया। लोगों ने अपने घरों में रहकर ही पूजा की।’

किसान भी मनाते हैं यह पर्व

छत्तीसगढ़ कला परंपरा पर शोध कर चुके वरिष्ठ संस्कृृति कर्मी डॉ. डीपी देशमुख ने बताया कि, ‘बस्तर का माटी तिहार, धरती परब या खद्दी परब एक ही है। यह पर्व बस्तर में केवल आदिवासियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि बस्तर के सभी किसान भी इसे अपनी सुविधा के अनुसार तिथि बदलकर मनाते हैं। लेकिन यह पर्व अक्सर मंगलवार को ही मनाया जाता है।

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